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________________ जैनविद्या - 22-23 22. "अट्ठ विह कम्म मुक्के अट्ठगुणढ़े अणोवमे सिद्धे। अट्ठम पुढविणि विढे णिढे यकजे य वंदियो णिच्चं ॥" - दश भक्ति, प्रभाचन्द्राचार्य की संस्कृत टीका, तात्यागोपाल शेटे प्रकाशित, शोलापुर 1921 ई., पहली गाथा, पृ. 46। सिद्धानुद्धत कर्म प्रकृति समुदयान्साधितात्म स्वभावान् । वन्दे सिद्धि प्रसिद्धयै तदनुपम गुण प्रग्रहा कृष्टि तुष्टः॥" . आचार्य पूज्यपाद, सिद्धिभक्ति, पहला श्लोक, पृष्ठ 27। 24. पण्डित आशाधर, जिनसहस्रनाम, स्वोपज्ञवृत्ति और श्रुतसागर सूरी की टीका - पण्डित हीरालाल जैन, सम्पादक, हिन्दी भाषा अनूदित, भारतीय ज्ञानपीठ, काशी, वि.सं. 2010, 10/139 की स्वोपज्ञवृत्ति, पृष्ठ 139 । 25. योगेन्दु, परमात्मप्रकाश, श्री ए.एन. उपाध्याय, सम्पादक, परमश्रुत प्रभावक मण्डल, मुम्बई 1937, 1/4 पृष्ठ 10। 26. पण्डित आशाधरजी, जिनसहस्रनाम, स्वोपज्ञवृत्ति, 6/72, पृष्ठ 90। 27. पण्डित आशाधरजी जिनसहस्रनाम स्वोपज्ञवृत्ति, वही, पृष्ठ 182 । 28. अमरकीर्ति के भाष्यसहित, पं. शम्भूनाथ त्रिपाठी, सम्पादक - भारतीय ज्ञानपीठ, काशी, वि.सं. 2007, तीसरा पद्य, पृष्ठ 2। 29. पण्डित आशाधर, जिनसहस्रनाम, भारतीय ज्ञानपीठ, फरवरी 1954, 6/75 की स्वोपज्ञवृत्ति, पृष्ट 921 30. Bimal Charan Law, Some Jain Canonical Sutras, Royal Asiatic Society, Mumbai, 1949, A.D. P. 148. 31. पण्डित आशाधरजी, अनगार धर्मामृत, आठवाँ अध्याय। 32. आचार्य कुन्दकुन्द, समयसार, श्री पाटनी दि. जैन ग्रंथमाला, मारौठ, 1953, 10वीं गाथा, पृष्ठ 21। 33. पण्डित आशाधर, जिनसहस्रनाम, भारतीय ज्ञानपीठ, 1954, 8/54, हिन्दी अनुवाद। 34. पण्डित आशाधरजी, वही। - मंगल कलश 394, सर्वोदय नगर, आगरा रोड अलीगढ़-202 001
SR No.524768
Book TitleJain Vidya 22 23
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamalchand Sogani & Others
PublisherJain Vidya Samsthan
Publication Year2001
Total Pages146
LanguageSanskrit, Prakrit, Hindi
ClassificationMagazine, India_Jain Vidya, & India
File Size9 MB
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