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जैनविद्या - 19
अप्रेल - 1997-1998
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गणितीय जिनागम गंगा के भागीरथ : आचार्य शिरोमणि श्री नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती
- प्रोफेसर लक्ष्मीचन्द्र जैन
एवं प्रोफेसर डॉ. पद्मावतम्मा
1. भूमिका ___ आइन्स्टाइन ने एक व्याख्यान में कहा - "सभी अन्य विज्ञानों से ऊपर गणित को विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त होने का एक कारण यह है कि उसकी प्रतिज्ञप्तियाँ प्रकेवल रूप से निश्चित एवं विवादरहित होती हैं वहीं अन्य विज्ञानों की कुछ सीमा तक विवादास्पद होती हैं तथा नये आविष्कृत तथ्यों द्वारा निरस्त किये जाने के सतत संकट में होती हैं । गणित के उच्च सम्मान का दूसरा कारण यह है कि गणित के द्वारा शुद्ध प्राकृतिक विज्ञानों में किसी सीमा तक जो निश्चितता प्रविष्ट हुई पाई जाती है वह गणित के बिना उपलब्ध नहीं हो सकती थी।"" अणु-शक्ति उद्घाटित करनेवाले गणितीय सूत्रों के प्रणेता आइन्स्टाइन के उपरोक्त सबल एवं प्रत्यक्ष प्रमाणों से यह तथ्य पूर्णतः स्पष्ट है। जिनागम में गणित की प्रतिष्ठा कराने का सर्वाधिक श्रेय आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती को जाना चाहिये। उन्होंने आगे आनेवाली पीढ़ियों के लिए जैनधर्म के सारभूत पूर्वो के कर्म-सिद्धान्त विषयक जटिलतम ज्ञानांश को गणितीय सूत्रबद्ध रचनाओं में पिरो दिया।