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________________ जैनविद्या 149 13. डॉ. भागचन्द भास्कर- एम. ए., पीएच. डी., डी. लिट., साहित्याचार्य । पालि, प्राकृत, संस्कृत भाषाओं के विद्वान् । भारतीय इतिहास एवं संस्कृति तथा बौद्ध दर्शन के विशेषज्ञ । सम्पादक एवं लेखक । अध्यक्ष, पालि प्राकृत विभाग, नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर । इस अंक में प्रकाशित निबन्ध-महाकवि वीर की दार्शनिक दृष्टि । सम्पर्क सूत्र-न्यू एक्सटेंशन, सदर, नागपुर, महाराष्ट्र । 14. डॉ. महेन्द्रसागर प्रचण्डिया-एम. ए., पीएच. डी., डी. लिट्., साहित्यालंकार, विद्या वारिधि/सम्पादक एवं लेखक । कुशल वक्ता एवं चिन्तक । अनेक शैक्षणिक, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थानों से सम्बद्ध/मानदसंचालक, जन शोध अकादमी, अलीगढ़। इस अंक में प्रकाशित निबन्ध-जंबूसामिचरिउ के यशस्वी प्रणेता महाकवि वीर का व्यक्तित्व । सम्पर्क सूत्र-मंगलकलश, 394 सर्वोदयनगर, आगरा रोड, अलीगढ-202001, उ. प्र. । 15. श्री श्रीयांशकुमार सिंघई-शास्त्री, प्राचार्य (जैनदर्शन), शोध स्नातक । कवि एवं लेखक । प्रवक्ता, भाषाविज्ञान, श्री दिगम्बर जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयपुर । इस अंक में प्रकाशित निबन्ध-जंबूसामिचरिउ के नारी-पात्र । सम्पर्क सूत्र-श्री दिगम्बर जैन स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय, मनिहारों का रास्ता, जयपुर-302003 ।
SR No.524755
Book TitleJain Vidya 05 06
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPravinchandra Jain & Others
PublisherJain Vidya Samsthan
Publication Year1987
Total Pages158
LanguageSanskrit, Prakrit, Hindi
ClassificationMagazine, India_Jain Vidya, & India
File Size14 MB
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