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________________ How does a light bulb work? - DH, Casselberry, FL (and also KH) In a common incandescent light bulb, an electronic current flows through a double spiral coil of very thin tungsten wire. As the electric charges in the current flow through this tungsten filament, they collide periodically with the tungsten atoms and transfer energy to those tungsten atoms. The current gives up its energy to the tungsten filament and the filament's temperature rises to about 2500° C. While all objects emit thermal radiation, very hot objects emit some of the thermal radiation as visible light. At 2500° C object emits about 12% of its heat as visible light and this is the light that you see coming from the bulb. Most of the remaining heat emerges from the bulb as invisible infrared light or "heat" light. The glass enclosure shields the filament from oxygen because tungsten burns in air." अनुवाद प्रश्न - बल्ब लाईट (लटु) का निर्माण कैसे किया जाता है ? उत्तर - बल्ब लाईट का काच का गोला गरम काच को पहले मोटा बनाकर बाद में बल्ब के आकार में ढाल दिया जाता है। इस गोले को ठंडा करने के बाद इनके अंदर की तरफ ऐसे पदार्थ का लेप कर दिया जाता है जिससे उसका रंग सफेद दिखाई देता है। टंगस्टन धातु का पतला तार (filament) बनाया जाता है जिसकी चौड़ाई केवल 42 माइक्रोन अर्थात् .0017 इंच) ही होती है। पहले उसका एक गुच्छा बनाया जाता है और इस गुच्छे को भी गुच्छे के रूप में बंट दिया जाता है। गुच्छे बनाने के लिए काम में लिए जाने वाले मेन्ड्रल को गुच्छों में ही फंसा दिया जाता है और फिर तेजाब की सहायता से उन्हें पिघला दिया जाता है। तैयार फिलामेंट को ऊर्जा देने वाले लीड के साथ वेल्डिंग कर दिया जाता है। लीड (lead) को पहले से ही एक काच के आधार देने वाले ढांचे के साथ जड़ दिया जाता है। इस आधार रूप काच को बल्ब के अन्दर उतार कर दोनों काचों का मिलन कर दिया जाता है। आधार रूप काच के अन्दर रही हुई नलिका के माध्यम से बल्ब के गोले में रही हुई हवा को बाहर पंप कर देने की सुविधा निर्माताओं को मिल जाती है और उसके बाद फिर उस गोले में दूसरी निष्क्रिय वायु भर दी जाती है। जब बल्ब में बचा हुआ ऑक्सीजन समाप्त प्रायः कर दिया जाता है तब नलिका को काट दिया जाता है और छिद्र को सील कर दिया जाता है। बल्ब के आधार को जोड़ने पर बल्ब उपयोग के लिए तैयार हो जाता है। 46 - - तुलसी प्रज्ञा अंक 123 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.524618
Book TitleTulsi Prajna 2004 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShanta Jain, Jagatram Bhattacharya
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2004
Total Pages114
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Tulsi Prajna, & India
File Size6 MB
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