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संगठित की जायं । ६. अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को प्रसारित किया जाय । ७. प्रत्येक राष्ट्र में न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था उपलब्ध हो ।
कुछ महीनों के पश्चात् सन् १९४४ के मई महीने में प्रोटेस्टेन्ट, केथोलिक और यहूदी सम्प्रदायों की प्रतिनिधि संस्था, ब्रिटेन की कौंसिल ऑफ क्रिश्चियंस एण्ड जियूज ने उपरोक्त घोषणा का स्वागत करते हुए एवं तत्रान्तर्गत सिद्धांतों के प्रति समर्थनात्मक भाव प्रदर्शित करते हुए एक विज्ञप्ति प्रकाशित की।
विश्वधर्म सम्मेलन में-जिसका मुख्य उद्देश्य धर्म के माध्यम से भ्रातृत्व की भावना का प्रसार और वैयक्तिक, राष्ट्रीय एवं धार्मिक विचार स्वातंत्र्य को अक्षुण्ण रखते हुए विश्व प्रेम की भावना को जागृत करना है, समस्त प्रचलित धर्मों के अनुयायी सम्मिलित हैं। भिन्न-भिन्न मतों के अनुयायियों की एक समिति द्वारा इस सभा को आमंत्रण प्राप्त हुआ है कि उपरोक्त घोषणा संसार के समस्त धार्मिक प्रमुखों को अवगत की जाय ।
विश्व धर्म सम्मेलन ऐसी महत्त्वपूर्ण प्रेरणा का स्वागत करते हुए दोनों विज्ञप्तियों को आपकी सेवा में प्रेषित करने का साहस करते हुए सादर अनुरोध के साथ यह जिज्ञासा करती है कि आप इनमें अभिव्यक्त सिद्धांतों के प्रति किस प्रकार अपना बहुमूल्य समर्थन प्रदान कर सकेंगे। सर्वसाधारण की यह एक महान् सेवा होगी, यदि आप अपने समस्त अधिकृत साधनों द्वारा इन विज्ञप्तियों की तरह अपने सम्प्रदाय के अन्य सदस्यों का ध्यान आकर्षित करते हुए उनकी अभिरुचि एवं समर्थन प्राप्त कर पायेंगे ।
- हमारा दृढ़ विश्वास है कि संसार के राजनीतिज्ञों के पथ-प्रदर्शन के लिए एक ऐसे विश्व मत को जागृत करना अत्यावश्यक है जिसके द्वारा भविष्य के निर्मायक साधनों को निश्चित करने का महान् कार्य सम्पन्न होगा।
इस प्रयत्न को अग्रसर करने के लिए क्या हम आशा करें कि आपका सहयोग, सहायता और सत्परामर्श हमें प्राप्त हो सकेंगे।
विश्व धर्म सम्मेलन के लिए
__ (ह०) ई० पामस्टीर्ना संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में ७-१०-१९४३ को हुए विश्वधर्म सम्मेलन बाबत कौंसिल ऑफ क्रिश्चियन एण्ड जियूज,
लंदन की ओर से जारी विज्ञप्ति का हिंदी अनुवाद अक्टूबर ७, सन् १९४३ को अमेरिका के प्रोटेस्टेन्ट, रोमन केथोलिक
खण्ड १९, अंक ३
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