________________
किया गया। विशेषज्ञों के दल ने 1998 में कुण्डलपुर आकर | मुनिसंघ की उपस्थिति रही। 7 दिन में दमोह से, आस-पास पुनः बड़े बाबा मंदिर का पूर्ण अवलोकन किया। भूकम्प | के क्षेत्रों से, देश के कोने-कोने से, विदेशों से पधारे 10 पश्चात् पुरातत्त्व विभाग द्वारा किये गये एक सर्वे में भी 80 | लाख श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इनमें जैन-अजैन, बालप्रतिशत मन्दिर के जर्जर होने तथा मंदिर के 70 स्तम्भों में से | अबाल, स्त्री-पुरुष सभी थे। राजनैतिक दलों के मंत्रियों, 19 के अपना स्थान छोड़ने की बात आई। इसलिए वास्तुविद | सांसदों, विधायको ने शिरकत की ओर राज्य के राज्यपाल सी. बी. सोमपुरा, अहमदाबाद तथा विशेषज्ञों की सलाह पर भाई महावीर, केन्द्रीय मंत्री धनंजय कुमार तथ तत्कालीन आवश्यक समझा गया कि वर्तमान में वायव्यमुखी प्रतिमा मुख्यमंत्री मा. दिग्विजय सिंह ने अपने मंत्रियों के दल सहित को पूर्व या उत्तरमुखी करके वास्तुगत दोष को दूर करते हुए इस नवनिर्माण का अनुमोदन करते हुए भरसक सहयोग का मूर्ति वहाँ से हटाकर प्राचीन भारतीय पंचायतन शैली के नये आश्वासन दिया। मंदिर में, जो रिक्टर पैमाने पर 8 तीव्रता तक के भूकंप को इस अद्भुत व अभूतपूर्व समारोह के अंतिम दिन सह सके, स्थापित किया जाये।
विशाल आयोजन स्थल और भगवान की वेदी प्रतिष्ठा के पाषाण निर्मित बिना सीमेंट और लोहे के उपयोग के चारों ओर बने परिक्रमामार्ग पर पाँच लाख व्यक्तियों के बननेवाले इस नये भव्य मंदिर निर्माण का प्रस्ताव आचार्य सम्मुख तीन विशाल, दो-दो हाथी वाले गजरथों के साथ श्री विद्यासागर तथा समाज के गणमान्य व्यक्तियों के समक्ष सात फेरी लगायीं आचार्यश्री सहित 189 मुनियों के सम्पूर्ण 14 फरवरी 99 को, विद्याभवन, कुण्डलपुर में पारित किया | संघ, 700 इंद्र-इंद्राणियों व गणमान्य नागरिकों ने। बडे बाबा गया। देश के मान्य प्रतिष्ठाचार्य पंडित नाथलाल शास्त्री. जितने ही बडे निराले कुण्डलपर के इस महामस्तकाभिषेक इंदौर, से भी विधि-विधान तथा शास्त्रसम्मत परामर्श करके | महोत्सव में, जिसके प्रबंधन में गायत्रीपरिवार से लेकर 3 मार्च 99 को नवमंदिर का शिलान्यास हुआ।
सभी धर्मानुयायियों ने सहयोग दिया। न केवल दमोह जिला मंदिर के जीर्णोद्धार का सीधा संबंध अब इस नव निर्माण से भारतवर्ष के नक्शे पर आया, अपितु जैनधर्म की प्रभावना में हो गया था अर्थात् जो नवीन मंदिर अब बनेगा उसी में बड़े अत्यधिक विस्तार हुआ और कुंण्डलपुर बन गया जैनबाबा अब विराजेंगे।
अजैन संस्कृति, राष्ट्रीय संस्कृति का अनूठा व अनुपम केन्द्र। नव मंदिर निर्माण की नींव
महोत्सव की सफलता ने 10-12 करोड के प्रारंभिक बजट 1999 से 2001 तक निर्माणसमिति ने पुराने मंदिर के को 50 करोड़ तक पहुँचा दिया। पास की पहाड़ी काटकर 1,05,000 वर्गफुट जगह समतल
| नव निर्माण कार्य जनवरी 2001-2006 की. रेतीली पहाड़ी पर भूकंप का असर न हो और नया फरवरी 2001 से प्रारंभ नव निर्माण कार्य निर्विघ्न मंदिर 1000-2000 वर्ष सुरक्षित रहे, इसलिए 387 गहरे | चलता रहा, जनवरी 2006 तक। साधुओं ने साधना की, गड्ढे खोदकर उनमें हजारों बोरी सीमेंट डालकर ग्राउंटिग अनेक दाताओं ने मुक्तहस्त से दान दिया, भक्तों ने भावना की गयी। वास्तुविद् सी. बी. सोमपुरा को मंदिर वास्तुशिल्प धारी, स्वयंसेवकों ने सेवा की एवं निर्माण समिति ने निर्माण का कार्यभार सौंपा गया। 2000 तक मंदिर की नींव पड कार्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया। वर्तमान में 35 फुट
ऊँचा आधे से अधिक गर्भगृह बन चुका है। मंदिर में प्रथम महामस्तकाभिषेक तथा नवमंदिरनिर्माण की | दानदाताओं का 9-10 करोड़ रुपया लग चुका है। अनुमोदना
शासन प्रशासन व पुरातत्त्व विभाग के साथ संवाद सकल जैन समाज, शासन-प्रशासन के समक्ष नव क्षेत्रसमिति ने गुरुवर के आदेश को शिरोधार्य करते मन्दिर निर्माण की समस्त योजना की प्रस्तावना रखने एवं | हुए निर्माण को संभव बनाने हेतु शासन-प्रशासन एवं पुरातत्त्व अनमोदन लेने के लिए 2001 में बडे बाबा का प्रथम विभाग को विश्वास में लेने के हर संभव प्रयास किये। महामस्तकाभिषेक आयोजित किया गया। 21 फरवरी से 27 क्षेत्रसमिति व निर्माणसमिति ने इस दृष्टि से विशेषज्ञों, फरवरी तक चले आस्था के इस महाकुंभ में 51 दिगम्बर | पुरातत्त्वविदों तथा अधिकारियों के साथ कई बैठकें की। साधु, 114 आर्यिका माताजी, 4 ऐलक महाराज, 8 छुल्लक | पुरातत्त्व में जानकारी व रुचि रखने तथा कुंडलपुर पर महाराज तथा 1 छुल्लिका माताजी सहित 179 सदस्यों के | आधिकारिक पुस्तक लिखने के कारण एकाध बैठकों में
गई।
अगस्त 2006 जिनभाषित 13
Jain Education International
For Private & Personal Use Only
www.jainelibrary.org