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ચટપટી અજબ મીઠાઈ.
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मनुष्य नर का नारायण हो सकता है "ज्ञानादेवहि कैवल्यम्" यह सत्य, त्रिकालाबाधित सत्य है। ज्ञान ही तो पापपंक से मुक्ती दिलाने वाला प्रचंड चंड ब्रह्मास्त्र है, ज्ञान ही से भले और बुरे का परिचय पाया जाता है, ज्ञान ही से ग्रहणाग्रहण का बोध होता है, ज्ञान ही की प्रभावपूर्ण चमक से असत्कर्म मय काला अंधकार स्वतः ही नष्ट होने लगता है, और इसी ज्ञान के बल पर अपनी प्यारी मिठाई पाई जा सकती है। अन्यथा "मुक्तिनस्या अन्मशतैरपि" यही अज्ञान ही तो मुक्ती का कट्टर शत्रु है। मही चतुर्विध कषायों का मूल है। यदि सौभाग्य से यह दूर हो जाय तो वही मुक्त हो सकता है, वही प्यारी शिवनारी के हाथ की मिठाई खा सकता है। ___यही मुक्ती मिठाई के मिलाने का सर्व दर्शन सम्मत सहज और सरल मार्ग है। हां भिन्न २ पन्थोंने और मत्तोंने ज्ञान प्राप्ती के लिये अपना २ तरीका क्रियाकांडानुसार भले ही जुदा २ बना लिया हो तथापि वे उनके उत्तरगुण मूलगुण ही की पुष्टी के अर्थ हैं। समस्तों का गन्तव्य पथ भले ही न्यारा हो किंतु स्थान वही है और लक्ष भी वही है। जब ज्ञान होगा तव स्वयं ही कषायों से मुक्ती हो जायगी, न द्वेष रहेगा न राग, न लोभ रहेगा न काम, न सुख रहेगा न दुख सबका निपटारा हो जायगा, मनुष्य मुनी बन जायगा, वीतराग हो जायगा यही तो मुनी शब्द व्याख्या है-यही तो मोक्ष रूपी मिठाई के प्राप्ती का सीधा तरीका है
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः। . वीतरागमयक्रोधास्थितधीर्मुनिरूच्यते ॥ पाठकों लेख का कलेवर बढ रहा है एतदर्थ इस विषय पर फिर कभी लिखा जायगा । अस्तु, प्यारे वाचकों क्यों यह है न अद्भुत् मिठाई, यदि आपकी इसे चखने की मनीषा हो तो आइये, और ज्ञान के समुज्ज्वल प्रकाश में बैठकर मनमानी मिठाई खाइये, ता कि चारों आघाति की का क्षय हो जाय (नाम, गोत्र, आयुष्य, कर्म)। बस इसी मिठाई को लेकर हम आपके आगे धर रहे हैं, खाओ २ खूब पेट भरकर खाओ और सच्चिदानंद रुप बन जावो । आनन्द कंद सच्चिदानंद अरिहंत सभी को इस अनोखी और अनूठी मीठी मिठाई का स्वाद चखावे यही सानुनय प्रार्थना है। ॐ शम्
नहीं संसारमें कुछ भी भरा है सार यह देखो। सभी झूठी तजो झंझट मजा मुक्ती का अब चक्खो॥
खालो पेट भर यारों मधुर मीठी मिठाई को। इसी में भद्र आनन्द है विचारो कुछ जरा इसको ।