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________________ है। धरण पार्श्वनाथ का यक्ष है। 'विपाकसूत्र' का यह उल्लेख नौवीं शताब्दी के रोहतक में पार्श्वनाथ की पूजा की लोकप्रियता को दर्शाता है। रोहतक के श्रावकों का खरतरगच्छवृहद्-गुर्वावलि में उल्लेख इस बात की ओर संकेत करता है कि जैनधर्म चाहमान और इसके बाद के कालों में भी रोहतक में पल्लवित होता रहा और इस नगर में जैन- मतावलम्बियों की उस समय एक बड़ी संख्या थी। इस आलेख में प्रकाशित पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं से इस विचार की पुष्टि होती है। ग्रन्थ-सूची 1. इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इण्डिया, प्रोविन्शियल सीरीज, पंजाब, वॉल्यूम 1, 1908, पृ. 247 2. पंचविंश ब्राह्मण, (14.3.12), पृ. 354 3. महाभारत, खण्ड 4, 19-33 4. महाभारत में वर्णित रोहितक का समीकरण जयचन्द्र विद्यालंकार ने सर्वप्रथम 1936 ई. में किया था। .. 5. जे.सी. जैन, लॉइफ इन ऐन्शियण्ट इण्डिया ऐज डिपिक्टेड इन जैन कैनन्स, दिल्ली, 1947, पृ. 328 6. वी.एस. अग्रवाल, वामनपुराण: ए स्टडी, वाराणसी, 1964, पृ. 7 7. गिलगिट मैनुस्क्रिप्ट, खण्ड-तृतीय, भाग-1, पृ. 2 (स.) नालिनाक्ष दत्त । 8. वही, खण्ड तृतीय, भाग 1, पृ. 33-34 9. महामयूरी (स.), सिल्वां लेवी, 1915, पृ. 64-68 10. दिव्यावदान (स.), पी.एल. वैद्य, दरभंगा, पृ. 67 11. सी.जे. रोजर्स, लिस्ट ऑफ ऑब्जेक्ट ऑफ आर्कयोलॉजिकल इंटेरेस्ट इन पंजाब, कलकत्ता, _____1891, पृ. 74-76 12. बी.सी. भट्टाचार्य, दि जैन आइकोनोग्राफी, लाहौर, 1939, फलक-6 13. इण्डियन आर्केयोलॉजी, 1959-60 ए रिव्यू, पृ. 74, फलक-60-डी तथा 61 14. उमाकान्त पी.शाह, स्टडीज इन जैन आर्ट, बनारस, 1955, पृ. 17 15. एम.ए. ढाकी, 'सम अर्ली जैन टेम्पल्स इन वेस्टर्न इण्डिया', महावीर जैन विद्यालय गोल्डन जुबली, वाल्यूम, बम्बई, 1968, पृ. 293 16. मारुति नन्दन प्रसाद तिवारी, जैन प्रतिमा विज्ञान, वाराणसी, 1981, पृ. 52 तथा 126 17. देवेन्द्र हाण्डा, 'जैन स्कल्पचर्स फ्रॉम रोहतक,' शिल्प संवित्। (स्टडीज इन जैन आर्ट एण्ड ___आइकोनोग्राफी एण्ड एलाइड सब्जेक्टस् इन ऑनर ऑफ डॉ. यू.पी. शाह), पृ. 67-72 18. समरी ऑफ पेपर ऑफ दा आल इण्डिया सैमिनार ऑन जैन कैनोनीकल लिटरेचर, अहमदाबाद, 1986, पृ. 14 19. रमेश जमींदार, पोलिटिकल कंडीशंस एज नैरेटेड इन द विपाकसूत्र, हाण्डा देवेन्द्र(सं.) अजय-श्री, रीसेन्ट स्टडीज इन इण्डोलॉजी, (प्रो. अजय मित्र शास्त्री, फेलिसिटेशन, वाल्यूम) भाग-1, दिल्ली, 1989, पृ. 102 से उद्धृत। प्राकृतविद्या अक्तूबर-दिसम्बर '2002 4061
SR No.521369
Book TitlePrakrit Vidya 2002 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajaram Jain, Sudip Jain
PublisherKundkund Bharti Trust
Publication Year2002
Total Pages116
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Prakrit Vidya, & India
File Size14 MB
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