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________________ २४ अनुसन्धान-७२ दुहा कर जोडी वीनती करे सुंण ससनेहा साध भटके घर घर भीखने कहोनी कुंण फल लाध... १ कुंण अपराधी अहवो आ दीधी २३तुम सीख ईण वेलां तुं ओकलो मांगे घर घर भीख... ईसी सीख किम मानीओ लही मानव अवतार जिण ओ भोग न भोगव्या किण लेखे अवतार... ३ ढाल - ४ (रांम चंद के बाग चंपो मोरी रह्यो री... ए देशी) सुण ससनेहा संत, कांमण अर्ज करे री थे गीरूवा गुणवंत, घर घर कांय फीरे री... १ आ कीण दीधी हे सीख, जोवन दीख ग्रही री घर घर मांगे भीख, कहो काहा सीध लही री... २ किण धूतारे धूत, चितडो धूत लीयो री लेई कीयो अवधूत, फिर फिटकार दीयो री... ३ फिरो उभैराणे पाव, सुंण आषाढ मुंणी रे सूक लुखो खाय, किहां सीध सूंणी री... ४ पहरी मेला वेस, सोच न कछुय कीयो री मसतक तुंच्या केस, देही दुख दीयो री... २ लुल लुल लागुं पाय, साहिब कह्यो करो री थे सहुने सुखदाय, हमसुं प्रीत वरो री.... परणो जोवन वेस, नरभव सफल करो री २८सूंथे भीनां केस, कांमण चित धरो री... सुंण ससनेहा सांमि, भेख परहो तजो री थे अम्ह आत्मराम, मंदिर सेझ सझो री... २३. कुण चो. । २४. दीक्षा । २५. अलवांणे - चो. । अडवाणा पग । २६. तिहां काह सिद्ध सुणिरी - चो. । २७. लळी लळी । २८. सुधे - चो. ।
SR No.520573
Book TitleAnusandhan 2017 07 SrNo 72
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages142
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size9 MB
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