SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 245
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ - २२२ अनुसन्धान-६४ देस अभिनव देखीया, लिख्या चित्रांकित लेख, लहु मरुधर सम महीयलें, ओपम नावै एक. ५ धर मरुधर मारू तणी, वांणी अकल विवेक, तोड न आवै तरतमां, देख्या देस अनेक. ६ चंगा नर चंगी धरा, वनिता चंगे वेस, मारवाड सम को नही, देख्या केइ देस. ७ मनोहर लहु मरु देशमें, महीतीय(यल)तिलकसमान, .. गोडवाड गुणियल धरा, इन सम अवर न आन. ८. दीपत तिण देशें घणा, जनपद जगतप्रसिद्ध, सहिर घांणोरा है सिरै, ऋद्धि-वृद्धि-संमृद्ध. ९ वापि कूप सर गिर सजल, गढ मढ मिंदर गौख; वन उपवन सरिता वने, घर घर पदमणि जौख.३४ १० . सह मिंदर सुंदर वणे, वणिया वाग विहद्, विहसित चंदावदनीया, है घांणोरा हट्ट. ११ ॥ तो छंद हाटक ॥ दीपै तिण देसें, देसमुगट-मणि लायक लहुमरुदेश, वसहै तिहां भल्ला, सैहर अवल्ला, घांणोरा सुविसेश, तस आगल लंका, मन धरि संका, पैठी सिंधु सुथांन एसों घांणोरा, सहिर मनोहर, इंद्रपुरी अनुमान. १ भारीकम ठांणा, सखर सुथांना, वन वाडी आराम, कैलासिक थांनं, लंका मांनं, वडे वडे इतमाम, वातां सुणी वयणे, लखिया नयणे, नही इण नयर समांन, । ___ एसों घांणोरा.... २ राजै तिण राजै, राजराजेश्वर, मेडतीयां सिरमोड, अनमी अरु धरमी, है वड करमी, राज करै राठोड, भुजप्राक्रम भारी, इल अवतारी, दिन दिन चढतै वान, एसों घांणोरा.... ३ Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.520565
Book TitleAnusandhan 2014 08 SrNo 64
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2014
Total Pages298
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size4 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy