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________________ 27 'सम्मतिशास्त्र इवाऽस्मदिष्टतमाः' एवो उल्लेख शिष्य तरीके स्वीकारवा माटे पर्याप्त छे. आ बधुं ज तेमने उपाध्यायजीना पत्र १७मां ८५ श्लोको छे. १ - १६ पद्योमां मङ्गलाचरण छे, जे ‘श्रीपञ्चतीर्थजिनवर्णनम्' नामे कर्ता ओळखाव्युं छे. १७ - ३७मां वगडी वर्णन छे. ३८६२ वीजापुर - स्याहपुरना वर्णननां छे. तेमां ते क्षेत्रना यवन (मुस्लिम) शासकनुं नाम ‘स्याह सक्कन्दर' (सिकन्दर शाह) (४९-५०) होवानुं जाणवा मळे छे. आ स्थानिक सूबानुं नाम लागे छे. ५६ - ६२मां वांचन, स्वाध्याय, पर्युषणनां कृत्य आदिनुं निरूपण छे. ६३-७५ मां गुरुवर्णन, पत्रप्रसादी पाठववा माटे विज्ञप्ति (७६), वन्दना-क्षमा-निवेदन (७७-७८) छे. ७९-८२मां तत्रस्थ मुनिवृन्दनां नाम तथा वन्दनादिनुं, ८३मां, साथेना २ मुनिनां तथा स्थिरवास रहेल १ मुनिनुं नाम वगेरे निवेदन छे. छेल्लां २ पद्योमां सङ्घ तरफथी वन्दना तथा संवत् आदिनी नोंध छे. पत्र १८ मां ७८ श्लोक छे. १ ९ मङ्गल, १०-३१ उदयपुरवर्णन, ३२५७ नगरवर्णन (स्याहपुर) तथा व्याख्यान - पर्वकृत्य आदिनुं निवेदन, ५८-७० गुरुवर्णन अने ७१ मां वन्दन - निवेदन छे. ७२मां गुरु साथेना श्रीपुण्यसुन्दर पण्डितने स्मरतां कवि कहे छे के जेम अमने सम्मति [ तर्क ] शास्त्र बहु गमे छे तेम आ मुनिवर पण अमने बहु इष्ट छे. आ एक नोंधपात्र उल्लेख गणाय. उपाध्यायजीना शिष्य होय तो ज सम्मतिशास्त्र गमतुं होय, एवं तारण काढीए तो ते वधु पडतुं न गणाय ७२ - ७४मां साधुगणनुं स्मरण, ७५मां साथेना २ तथा स्थिरवासी १ मुनिनुं वन्दन निवेदन, छेवटे पत्रसमापन करतां संवत्-निर्देश कर्यो छे. आ बे विज्ञप्तिपत्रोनी नकल लींबडीना श्रीआणंदजी कल्याणजी पेढीना ज्ञानभण्डारथी प्राप्त थयेल छे. Jain Educationa International ( १९ ) विद्यापुरथी मुनि पद्मानन्दे राजनगरस्थित गच्छपति (क्यांय गुरुनो नामनिर्देश जडतो नथी) पर लखेल, गद्य-पद्यमिश्रित, ५६ श्लोकप्रमाण आ पत्र छे. संवत्नो निर्देश नथी, पण १७मा शतकनो होवानुं अनुमान थाय छे. कविनी प्रतिभा पत्रमां सुपेरे झळके छे. कवि प्रौढ प्रतिभाना स्वामी होवानुं तेमणे प्रयोजेला मालायमक For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.520562
Book TitleAnusandhan 2013 07 SrNo 61
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2013
Total Pages300
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size5 MB
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