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________________ ७२ अनुसन्धान ४४ ८४ लाख वरसनो, ७२ लाख वरसनो, ६० लाख वरसनउ आयुषओ होइ. ३० लाख वरसनउ, १० लाख वरसनउ, एक लाख वरसनो, इम एतलांनइ लाख वरसनो कहीयइं. ॥ १५ ॥ पंचाणउइ सहस्सा १७ चउरांसीई य १८ पंचवन्ना य १९ । तीसा य २० दस य २१ एगं २२ सयं च २३ बावत्तरी २४ चेव ॥ १६ ॥ पंचाणु सहस्त्र वरसनउ, चउरासी हजार वरसनउ, पंचावन हजार वरसनउ, ३० हजार वरसनउ, १० हजार वरसनउ, १ हजार वरसनउ, १०० वरसनउ, बहुत्तर वरसनो श्रीमहावीरनो निश्चइ. ॥१६॥ ७- दीक्षातप सुमतित्थ निच्चभत्तो निग्गओ वासुपुज्जो जिणो चउत्थेणं । पासो २३ मल्ली विय १९ अट्ठमेण सेसाओ छट्ठेणं ॥१७॥ ७. दीक्षा लेता तप कितो कीधो. सुमतिनाथ जीमीनइ दीक्षा लीधी. नीकल्या वासुपूज्यजिन एक उपवास करीनइ. पार्श्वनाथ अनइ मल्लिनाथ अट्ठम करीनइ दीक्षा लीधी. शेष २० तीर्थंकरे बि उपवासे दीक्षा लीधी. ॥१७॥ ८. दीक्षाठाम उसभो य १ विणीयाए बारवईए अरिट्ठवरनेमी |२२| अवसेसा तित्थयरा निक्खंता जम्मभूमीसु ॥ १८॥ ८. दीक्षा केणइ ठामं लीधी ते कहइ छइ. ऋषभइ विनीतानगरीइ दीक्षा लीधी. द्वारिकानगरी नेमिनाथ दीक्षा लीधी. शेष बावीस तीर्थंकर नीकल्या जिहां जन्म हुआ तिणं नगरइ. ॥१८॥ ९-दीक्षावननाम उसभो १ सिद्धत्थवणं - मि वासुपुज्जो १२ विहारगेहंमि । धम्मो य १५ वप्पगाए नीलगुहाए मुणि २० नामो ॥१९॥ ९ - दीक्षा जेणइ वनखंड लोधी तेहना नाम ऋषभइ सिद्धार्थवनइ. वासुपूज्य विहारगृहनइ विषइ. धर्मनाथ [----], नीलगुहानगरमइ वनखंडे मुनिसुव्रतइ दीक्षा लीधी ॥ १९ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.520544
Book TitleAnusandhan 2008 06 SrNo 44
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2008
Total Pages126
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size6 MB
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