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________________ जिन सूत्र भागः 2 तरु ने कुछ मांगा नहीं। जो उसे मैंने कहा, उसने किया है। | दस-पांच मिनट भी उसको रुकना पड़ता तो वह नाराज हो जाता, कहा, गीता पढ़ तो गीता पढ़ी। कहा, उपनिषद पढ़ तो उपनिषद चीख-पुकार मचाने लगता। पढ़ा। कहा, चल जिन-सूत्र पढ़ तो जिन-सूत्र पढ़े। कहा, कोई दस साल तक ऐसा चला। एक दिन आया लेने तो जो धम्मपद पढ़ तो धम्मपद पढ़ा। कहा, भजन गा भजन गाए। जो क्लर्क उसे देता था और भी भिखमंगों को रथचाइल्ड बांटता उसे कहा, उसने किया है। मांगा उसने कुछ नहीं। जो करने को था। बहुत धन उसने बांटा—उसने कहा कि इस तारीख से अब कहा है, उसे इंकार नहीं किया। उसने सरलता से मेरे हाथों में तुम्हें पचास डालर ही मिल सकेंगे। उसने पूछा, क्यों? सदा ड़ा। उसके परिणाम होने स्वाभाविक है। उसके मुझे सौ मिलते रहे। सालों से मिलते रहे। यह फर्क कैसा! उस महत परिणाम होते हैं। क्लर्क ने कहा कि ऐसा करें, मालिक का धंधा बहत लाभ में नहीं तो यह संभव हो सका कि जिसका उसे खयाल भी नहीं रहा | चल रहा है। और उनकी लड़की की शादी हो रही है। और उस होगा, जो वह कभी सपने में भी मांग नहीं सकती थी, उस तरफ | लड़की की शादी में बहुत खर्च है। तो उन्होंने सभी दान आधा यात्रा शुरू हुई। कर दिया है। जब तुम अपने अतीत से कुछ भी दोहराना नहीं चाहते, तो वह तो एकदम टेबल पीटने लगा। उसने कहा बुलाओ अभिनव का पदार्पण होता है। परमात्मा सदा नया है। सत्य सदा | रथचाइल्ड को, कहां है! मेरे पैसे पर अपनी लड़की की शादी? नया है। सत्य इतना नया है कि उसकी कोई धारणा भी नहीं की एक गरीब आदमी का पैसा काटकर लड़की की शादी में मजा, जा सकती। और एक बार तुम्हें सत्य के इस नयेपन का अनुभव गुलछर्रे उड़ाएगा? बुलाओ, कहां है! हो जाए तो तुम सब मांग छोड़ देते हो। तब एक नई प्रतीति होनी | रथचाइल्ड ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मैं गया और शुरू होती है कि इतना मिल रहा है और हम याचक बने हैं! हमने मुझे बड़ी हंसी आयी। लेकिन मुझे एक बात समझ में आयी कि मांगा यहीं भूल हो गई। | यही तो मैं परमात्मा के साथ करता रहा हूं। फिर तम जो मांगते हो. अगर मिल जाए तो भी धन्यवाद पैदा यही तो हम सबने परमात्मा के साथ किया है। जो मिला है नहीं होता। क्योंकि जो तुमने मांगा है, तुम सोचते हो, तुमने उसका हम धन्यवाद नहीं देते। उस दस साल में उसने कभी एक अर्जित किया। लोग मांगने में भी अगर कई दिन तक मांगते रहें | दिन धन्यवाद न दिया। लेकिन पचास डालर कम हुए तो वह तो धीरे-धीरे अधिकारी हो जाते हैं। वे सोचने लगते हैं, हमने नाराज था, शिकायत थी। और आगबबूला हो गया। उसके इतनी प्रार्थना की इसलिए मिला। प्रार्थना की इसलिए! पचास डालर काटे जा रहे हैं? भिखमंगा भी जब सड़क पर आधा घंटे मांगता रहता है और अगर तुमने मांगा तो पहली तो बात, मिलेगा नहीं। और शुभ तुम देते हो तो धन्यवाद थोड़े ही देता है। वह जानता है कि आधा | है कि नहीं मिलता क्योंकि तुम जो भी मांगते हो, गलत मांगते घंटे चीखे-चिल्लाए, श्रम किया। और अगर तुम रोज-रोज देने हो। तुम सही मांग ही नहीं सकते। तुम गलत हो। गलत से लगो तो धन्यवाद देना तो दूर, अगर तुम किसी दिन न दोगे तो गलत मांग ही उठ सकती है। नीम में केवल नीम की निबोरियां वह नाराज होगा। ही लग सकती हैं, आम के सुस्वादु फलों के लगने की कोई रथचाइल्ड के संबंध में मैंने सुना है-यहूदी धनपति—एक | संभावना नहीं है। जो तुम्हारी जड़ में नहीं है, वह तुम्हारे फल में भिखमंगे को वह रोज हर महीने पहली तारीख को सौ डालर देता | न हो सकेगा। तुम गलत हो तो तुम जो मांगोगे वह गलत होगा। था। वह भिखमंगा उसे जंच गया। एक दिन बगीचे में उसी बेंच तो पहली तो बात-मिलेगा नहीं। और शभ है कि नहीं | पर आकर बैठ गया था। दया आ गई। कोई रथचाइल्ड के पास | मिलता। परमात्मा की बड़ी अनुकंपा है कि तुम जो मांगते हो, कमी न थी। उसने कहा कि तू सौ डालर हर महीने एक तारीख | वह नहीं मिलता। इसे कभी सोचना बैठकर कि तुमने जो-जो को आकर ले जाया कर। वह भिखमंगा इस तरह से उसके दफ्तर मांगा था अगर मिल जाता तो कैसी मुसीबत में पड़ते! में आने लगा, जैसे लोग अपनी तनख्वाह लेने जाते हैं। अगर लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि मिल जाता है। तो जो 4401 Jain Education International 2010_03 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.340153
Book TitleJinsutra Lecture 53 Piya ka Gav
Original Sutra AuthorN/A
AuthorOsho Rajnish
PublisherOsho Rajnish
Publication Year
Total Pages1
LanguageHindi
ClassificationAudio_File, Article, & Osho_Rajnish_Jinsutra_MP3_and_PDF_Files
File Size41 MB
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