________________ Aaon 6 . . . प्रश्न-सार संन्यास लेकर साधना करना, संन्यास न लेकर साधना करनादोनों स्थितियों में आपके मार्ग का ही अनुसरण है। फिर संन्यास से विशेष फर्क क्या? आपने कहा आंख आक्रामक होती है। लेकिन आपकी आंखों में तो प्रेम का सागर दिखता है, और जी करता है उन्हें निहारता ही रहूं। क्या आंख को कान-जैसा ग्राहक बनाया जा सकता है? SHARE क्या स्वाद को भी परमात्म-अनुभूति का साधन बनाया जा सकता है? / भगवान का प्रवचन सुनते हुए उनकी आवाज से हृदय व कर्ण-तंतुओं पर एक अजीब तरह का कंपन। तब से साधारण ध्वनियों से भी अजीब कंपन व आनंद की लहर पैदा होना। क्या बुद्ध-पुरुषों के स्वर में विशेष कुछ ? साथ ही भगवान की उपस्थिति में एक आनंददायक गंध का मिलना। वही गंध कभी ध्यान में व आश्रम में अन्यत्र भी मिलना। __ क्या काल-विशेष की गंध-विशेष भी होती है? आप कहते, संन्यास सत्य का बोध है। क्या संन्यास के लिए गैरिक वस्त्र व माला अनिवार्य? क्या कोई बिना दीक्षा लिये आपके बताए मार्ग पर नहीं चल सकता? / Jain Education International 2010_03 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org