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________________ 217 लागे ने जे आपो ते !' याज्ञिकसाहेब कहे; 'तमने रस पड़े तेवुं काम हवे अकादमीमां छे. भाषानियामक कचेरीमां तो मुख्यत्वे भाषान्तर अने बिनगुजरातीने गुजरातीना शिक्षणनुं छे.' अंते हुं सप्टेम्बर १९८२मां अकादमीना महामात्र तरीके जोडायो. भायाणीसाहेबने मारी ज नहीं, परिवारनी पण चिंता. ए खुश थया अने कहे : 'वर्षोथी मारा मनमां केटलाक प्रोजेक्टना विचार स्फूरे छे. ए विषे में बेॠण नोंध पण करी छे. एक तो गुजराती भाषानुं पोतानुं व्याकरण नथी. जे छे ते संस्कृतने आधारे घटाव्युं छे. हकीकते आ भाषाना ज प्रयोगो लक्षमां लई एनुं ऐतिहासिक व्याकरण तैयार करवुं जोईए. बीजुं आपणी पासे कथाओनो लिखितरूपमां अखूट भंडार छे. परंतु एवो एक पण कोश नथी जेने आधारे मुख्य कथाओनां कथानको जाणी शकाय त्रीजुं, हजु पण आपणी कंठपरंपरानां गीतोमां, विविध संस्कारनी विधिओमां आपणी संस्कृति धबके छे. परंतु नथी तो आपणे गवातां गीतोनां ध्वनिमुद्रणो कर्यां, नथी तो स्वरांकनो कर्यां के नथी तो कया केटला गीतो गुजराती जनजीवनना ऋतुचक्र अने जीवनचक्र साधे संकळायेला छे तेनो काचो पण अंदाझ काढ्यो. नरसिंह अने मीरांना नामे गवाती, कबीरना नामे गवाती परंपरामा केटली रचनाओ, पदभजन केटला छे तेनी कोई सूचि पण नथी. आ बधां अकादमीना माध्यमे करवा जेवां काम छे. ' में श्री मोहम्मद मांकड़ने वात करी. एमणे त्यानी स्थायी समितिमां रहेला सर्व श्री अनंतराय रावल, प्रवीण दरजी, इश्वर पेटलीकर साथे चर्चा करी. अने आ बधां ज प्रोजेक्ट तथा बत्रीश जेटली कायमी योजनाओ करी. भाषानियामकमांथी आ कामगीरी अने बजेट तबदील थयेलां तेमां तो मात्र २० लाखथी पण ओछ्रं हतुं. आ बधी ज चालु अने नवी योजनाओ तथा नवां पांच प्रकल्पो मूक्या अने तेनो प्लानमां समावेश थयो. ए साथे अकादमीने ५० लाखनी ग्रांट मळती थई, अकादमीनी योजनाना जे पाया नखाया तेना मूळमां पण आम भायाणीसाहेबना ज सूचनो, मार्गदर्शन, परिरूप उपयोगी बन्या. ऐतिहासिक व्याकरण अने कथाकोशनं काम भायाणीसाहेबे संभाळयुं Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229726
Book TitleEma Be Vat Che
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHasu Yagnik
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages16
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size421 KB
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