SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 4
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ११४ अनुसन्धान-५० सातइ न्हाना सातइ गुणी सातिं सात नरगगति हणी ॥९॥ सातइ चालइ एकइ च्यंत ज्यम तरणीना अश्व अत्यंत । रूप कला विलछी जेह तेणइ करी सातइ सरखा तेह ॥१०॥ सातइ मत्री छइ ख्यत्री ग्नाति रहइ एगठा दीन नि राति । एक एक पाखइ न विसरइ प्राहिं भोजन भेला करइ ॥११॥ ॥ दूहा ॥ भोजन करी करावीइ दूख सुख सूणी कहंत । दीजइ लीजइ प्रेमस्यु मेत्री एम वध्यंत ॥१२॥ वचन वाद निं, स्त्री एकात वणजह दुरि गया य । अवसरी चूक लोभई पड्यो मंत्री एम पलाय ॥१३॥ ॥ चोपई ॥ छइ दोष टालइ नर सार मंत्री राखइ सात कुमार । अचल धर्ण दीठइ आणंद पूरण वसू वेसमण अभीचंद ॥१४॥ म्हाबल राजा ते सातमो मंत्री-मेलो पूंनि हवो । सातइ साधकइ सुणता धर्म जाग्या टालवा पूर्वकर्म ॥१५॥ वरधर्म मुनीकइ दीक्षा लीइ अग्यार अंग गुरुं त्यांहांकणी दीइ । अनेक शास्त्र बीजां पणि भणइ करइ सझाय निं पातीक हणइ ॥१६॥ साति नर साथिं संचरइ विहारकरम महीमंडली करइ । सातइ राख्यो अस्यो वीचार सरखो तप करवो नीरधार ॥१७|| सरखो तप सहुंइ आदरइ माहाबल रषि त्याहा माया करइ । कहइ मस्तग दूखइ छइ अती तेणइ छठ करस्यु रे जती ॥१८॥ मन च्यंतइ हुं मोटो अही परभवि मोटो थाउं तही । एणइ ध्यानि तप अदीको करइ नारीवेद ऊपरयो सरइ ॥१९॥ माया कपट म करस्यो कोय क्रोध लोभ मानि तप खोय । तजी ईरख्या साधइ धर्म जाय मुगतिम्हा टाली करम ॥२०॥ मुगतिपंथ म्हाबल साधेह थानक केटलां आराधेह । तीथंकर नामकरम वली जेह तेणइ थानकई नीकाचइ तेह ॥२१॥
SR No.229668
Book TitleMallinath no Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDiptipragnashreeji
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages31
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size142 KB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy