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________________ फेब्रुआरी - २०१२ १०७ त्रिभुवनतिलक समान मोहादिक मन्थना हो लाल, मोहादिक मन्थना । सकलसुरिन्द्रना नाथ साथ शिवपंथना हो लाल, साथ शिवपंथना ॥१॥ व्यक्ति शक्ति अनन्त आतम निज पेखता हो लाल, आतम निज पेखता । सत्ता धर्म आसक्त उपाधि उवेखता हो लाल, उपाधि उवेखता । चरण सेवना स्वाद सुरिन्द्रथी आगला हो लाल, सुरिन्द्रथी आगला । समता संजम छा(ठा?)ण विना झूठी कला हो लाल, विना झूठी कला ॥२॥ रत्नपुरीमा धाम चैत्यचूडामणि हो लाल, चैत्यचूड़ामणि । अद्भुत रूप अनुपम ठवणा तुम तणि हो लाल, ठवणा तुम तणि । दीठी मुद्रा देव चन्द्रोदय दोहलि हो लाल, चन्द्रोदय दोहलि ।। सुरतरु कुसुम सुगंध मिलै किम सोहली हो लाल, मिलै किम सोहली ॥३॥ हूं धूं कर्माधीन मोहास्रव ऊछले हो लाल, मोहास्रव ऊछले । अशुभ करुं अनुष्ठान आणामें नवी मिले हो लाल, आणामें नवी मिले । खण्डित पर्पट रीत धर्म समाचरु हो लाल, धर्म समाचरु । सिद्धसमाननिधान आतमगुण विसरु हो लाल, आतमगुण विसरु ॥४|| दंभादिकना छंद तणी मुझ वासना हो लाल, तणी मुझ वासना । सहेज समाधि विधान करी न उपासना हो लाल, करी न उपासना । प्रभुपदपंकजध्यान भविक भवजल तिर्या हो लाल, भवजल तिर्या । मदनसुन्दरी भरतार सन्ताप संहर्या हो लाल, सन्ताप संहर्या ॥५॥ दुजो न जाचं देव सेव तुम पद सदा हो लाल, सेव तुम पद सदा । शरण तुम्हारो नाथ न छोडं हूं कदा हो लाल, न छांडुं हूं कदा । शान्ति परमसुखरूप जगतचिन्तामणि हो लाल, जगत चिन्तामणि हो लाल । रत्नविजय अरदास आसा पूरो मुझ तणि हो लाल, आसा पूरी मुझ तणि ॥६॥ ___ इति रत्नपुरीनाथ ऋषभदेव स्तवन । साधुजी श्री त्यागी महाराज रत्नविजय कृत स्तुति संवत् १९०२ आसोज सुदी ११
SR No.229604
Book TitleSacchayika Battisi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVinaysagar
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages10
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size78 KB
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