SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 4
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ४२ अनुसन्धान-५४ श्रीहेमचन्द्राचार्यविशेषांक भाग-२ लईने हमेशनी रीत प्रमाणे साधुनो बोध सांभळवा देरे गई अने चंगदेव तेनी पासेथी ऊठीने सर्वे लोकोनी अजायबी वच्चे गुरुनी खाली बेठके जइने बेठो. पेला साधु देवचन्द्र, जे देशाटन करतां करतां ओ समये धंधुका आवी पहोंच्या हता, ते आ बनावनो भेद बराबर समज्या. छोकरानी माने तेणे ओळखी काढी. ने पांच वर्ष पर तेणीने जे स्वप्न आवेलुं ने तेनो तेणे जे खुलासो तेणीने कहेलो ते देवचन्द्रे तेने याद देवडाव्यो. पाहीनीने का के तेणीओ पोताना ओ पत्रने धर्मने अर्पण करी देवो. पाहीनीओ तेम करवानी हा पाडी. ने चाचीगे पहेलां जो के पोताना पुत्रने आपी देवानी ना पाडी पण पछी तेने समजाववामां आव्यु त्यारे तेणे पण ते कबुल कीधुं. अम छतां पैसा लईने पोताना व्हाला पुत्रनुं वेचाण करी आपवानी तो घसीने तेणे ना पाडी. ओ वखतथी चंगदेव धर्मने कारणे पोताना मातापिताथी छूटो पड्यो ने डाह्या ने भला देवचन्द्रनी जोडे रही देशाटन करतो रह्यो. धंधुकाथी नीकळेला देवचन्द्रने चंगदेव खम्भातना अखातमां थइने खम्भात गया. त्यां महा सुद १४ ने रविवारने दिवसे चंगदेवने जैन साधु बनवानी सर्वे धर्मक्रिया कराववामां आवी. अने तेने सोमचन्द्र अq नाम आपवामां आव्युं. देवचन्द्रे आवा अक नाना छोकराने पोतानो चेलो बनाव्यो ते कोइने नवाई जेवू लागशे. पण खरी रीते जोतां तेमां कंइ नवाइ जेवू नथी. अq धोरण आ देशमां तथा बीजा देशोमां असलथी चाली आव्युं छे अने चाल्युं आवे छे. जो के जैन धर्मशास्त्रमा अम ठरावेलुं छे खरुं के "जे माणसने साधुओनो हमेशा बोध सांभळी ओवो विपाकनिर्णय थाय के आ जगत सघळु मायारूप छे ने जे मुक्ति मेळववानी तेनी इच्छा छे ते मुक्ति आ जगतमा रहेवाथी कदी मळी शकवानी नथी, तेवा ज पुरुषने साधु बनवा देवो." ते मुजब मोटी उमरे पहोंचेला माणसने ज साधु बनावी शकाय ने आवा ओक बाळकने साधु न बनावी शकाय. ओ धोरण सारुं छे खरं. पण बीजा सघळा धर्मोमां जोइशुं तो ओ ज रीते नवा आचार्योने पसंद करवामां आवे छे. ज्यां आचार्योने लग्नादिकनो प्रतिबन्ध होय त्यां पोतानी जगा लेनारो आचार्य बनाववा माटे आम कर्या सिवाय छूटको थतो ज नथी. धर्मिष्ठ स्त्रीओ पोताना दीकराओने धर्मने अर्पण
SR No.229450
Book TitleHemchandracharya tatha Yogshastra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPeter Piterson
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages22
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size131 KB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy