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________________ 64 खंगिल बोल्यउ ततखिणइ रे लो, ते मुज दृष्टिए दिखाडी रे सो० फलइ मनोरथ ताहरा रे लो , भारु तेह पछाडि रे सो० ॥१०२. दा० संकेत मारण करउ करी रे लो , देवी दहेरामांहि रे सो० घरि आव्यउ ऊतावलउ रे लो, धरतउ मनि उछाहि रे सो० ॥१०३. दा० परण्या देखी बेहुनइ रे लो , बोलइ शेठ वचन रे सो० कुलदेवी पूज्या विना रे लो , नही पामइ सुख तन्न रे सो० ॥१०४. दा० एम कही शेठ ऊठीयउ रे लो , भरीय चंगेरी फुल रे सो० रवि आथमतइ चालीया रे लो , करज्यो पूज अमूल रे सो० ॥१०५. दा० अर्चा ऊपगरण ल्येउ तुम्हे रे लो , वल्लभ अस्त्री साथि रे सो० सागरपुत्र दीठा तिण समइ रे लो , पूछइ झाली हाथ रे सो० ॥१०६. दा० जास्युं देवी देहरइ रे लो , करवा पूज रसाल रे सो० पूज अवसर तुम्ह नही रे लो , वीभक्त संध्याकाल रे सो० ॥१०७. दा० हुं जाइसि बइसिउ तुम्ह रे लो , ऊपगरण आपउ मुह्य(ज्ज) रे लो० नवपरणीत जास्यउ किहां रे लो , मनमा आणउ वज्ज रे सो० ॥१०८. दा० दूहा उपगरण लेइ चालीय पूजा करीवा आवीयउ भगनी-पति बइसारि देवीय तणइ दुवारि ॥१०९ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229389
Book TitleDamannaka Kul Putrak Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKalpana K Sheth
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages22
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size404 KB
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