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________________ 265 भगवान महावीर की निर्वाण तिथि पर पुनर्विचार 11 10. वीरजिणे सिद्धिगदे चउसदगिसट्ठिवासपरिमाणे। कालम्मि अदिक्कते उप्पण्णे एत्थ सकराओ।। 461 अहवा वीरे सिद्धे सहस्सणवकम्मि सगसयभहिए। पणसीदिम्मि यतीदे पणमासे सकणिओ जादो।। 9785 भास 51 चोदससहस्ससगसयतेणउदीवासकालविच्छेदे। वीरेसरसिद्धीदो उप्पण्णे सगणिओ अहवा।। 14793 णिव्वाणे वीरजिणे छव्वाससदेसु पंचवरिसेसु। पणमासेसु गदेखें संजादो सगणिओ अहवा।। 605 मा 51 - -- तिलोयपण्णति, 4/1496-1499 भवणिदेसु पंचमासाठियपंचुत्तरछस्सदवासाणि हवंति। एसो वीरजिणिदणिव्वाणगददिवसादो जाव सगकालस्स आदी होदि तावदियकालो। कुदो ? 605/5 एदम्हि काले सगणरिदकालम्मि पक्खित्ते वड्टमाणजिणणिव्वुदकालागमणादो। वुत्तं च -- पंच य मासा पंच य त्रासा छच्चेव होति वाससया। सगकालेण य सहिया थावेयव्वो तदो रासी।। अण्णे के वि आइरिया चोदससहस्स-सत्तसद-तिणउदिवासेसु जिणणिव्वाणदिणादो अइक्कतेसु सगणरिंदुप्पत्ति भणति14793 । वुत्तं च-- गुत्ति-पयत्य-भयाइं चोदसरयणाइ समइकंताई। परिणिव्वुदे जिणिदे तो रज्ज सगणरिंदस्स।। अण्णे के वि आइरिया एवं भणति। तं जहा -- सत्तसहस्स-णवसय-पंचाणउदिवरिसेसु पंचमासाहिएसु बढमाणजिणणिव्वुददिणादो अइक्कतेसु सगणरिंदरज्जुप्पत्ती जादो ति। एत्य गाहा -- सत्तसहस्सा णवसद पंचाणउदी सपंचमासा य। अइकंता वासाणं जइया तइया सगुप्पत्ती।। एदेसु तिसु एक्केण होदव्वं । ण तिण्णमुवदेसाण सच्चत्तं, अण्णोण्णविरोहादो। तदो जाणिय वत्तव्यं। -- धवला टीका समन्वित षट्खण्डागम, खण्ड भाग 4, 1, पुस्तक 9, पृ. 132-133 12. समणस्स भगवओ महावीरस्स जाव सव्वदुक्खपहीणस्स नव वास सयाइं विइकताई दसमस्स वाससयस्स अयं असीइमे संवच्छरे काले गच्छइ, वायणतरे पुण अयं वायणं तेरे पुण अयं ते णउए संवच्छरे काले गच्छइ इह दीसइ। -- कल्पसूत्र ( मणिकमुनि, अजमेर), 147, पृ. 145 13. पालगरण्णो सट्ठी पणपण्णसयं वियाणं णंदाणं । मरुयाणं अट्ठसयं तीसा पुण पुसमित्ताणं ।। -- तित्थोगाली पइन्नयं ( पइण्णयसुत्ताई), 621 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.229127
Book TitleMahavir ki Nirvan Tithi per Punarvichar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSagarmal Jain
PublisherZ_Sagar_Jain_Vidya_Bharti_Part_1_001684.pdf
Publication Year1994
Total Pages15
LanguageHindi
ClassificationArticle & Tirthankar
File Size447 KB
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