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________________ णमोकार मंत्र की महिमा दर्शाने वाली चुलीका (काव्य). एसो पञ्च णमोयारो, सव्वपावप्पणासणो !, मंगलाणं च सव्वेसिं, पढ़मं हवई मंगलम ! (1) "एसो" में "ए" "एडी" तथा "एक" वाला है ना कि "ऐनक" वाला, जबकि जब हम उच्चारण करते है तो - "ऐसो" करते है, जबकि यह "एसो" है "एक" वाला, "एक" से "ए" का उच्चारण लो तथा "एसो" से "सो" का उच्चारण लो और देखो क्या अंतर है। "एसो" का अर्थ "ऐसा" नहीं होता है! "एसो" का अर्थ "यह" होता है / (2) "णमोयारो" इसके पाठ भेद है "णमोयारो" "णमोक्कारो" तथा "णमुक्कारो", दिगम्बर में "णमोयारो" तथा, श्वेतांबर बंधुओ में "णमुक्कारो",व्याकरण से दोनों शुद्ध है, इसमें विवाद वाली कोई बात नहीं है दोनों का अर्थ एक ही है! (3) सव्वपावप्पणासणोः इस को हम लोग जब जल्दी में बोलते है तो कुछ उच्चारण के गलतिया करते है। वैसे अगर आपको व्याकरण के जानकारी है तो बताना सही होगा सव्वपावप्पणासणो में "सव्व" यहाँ पर स्वराघात नहीं करना है"पावप्प" यहाँ स्वराघात करना है ! (4) "पढ़मं" इसके उच्चारण पर विशेष ध्यान देने वाली बात है क्योंकि "पढ़मं" में "ढ" है न की "ड" ये "डमरू" वाला "ड" नहीं है, "ढोलक" "ढक्कन" वाला "ढ" है तो उच्चारण "पढ़मं" करे न की "पडमं", "पडम" में "ड" का उच्चारण थोडा सोफ्ट है जबकि "पढ़मं" में "ढ" का उच्चारण हार्ड है, "ढोलक" बोलो तथा "पढ़मं" बोलो क्या "पढ़मं" में "ढ" का उच्चारण "ढोलक" वाला आ रहा है। (5) "हवई" के भी 2 उच्चारण होते है "होई" तथा "हवई", "हवई" उच्चारण ठीक है। हम लोगो को उच्चारण करते समय ध्यान रखना होगाइस के लिए सिर्फ 21 दिन हम कोशिश करे सही उच्चारण करने की फिर अपने आपही सही उच्चारण आएगा उच्चारण में गलतिया करने से मात्राये कम या ज्यादा हो जाती है हमें उच्चारण 58 मात्राओ में ही करना चाहिये जैसे आइरियाणं का "रि" को लम्बा उच्चारण करदो या लोए का "ए" का उच्चारण लम्बा करदो तो मात्राए 58 या 60 हो जायेंगी / क्योंकि हमारे को आदत पड़ी हुए है। तो शुरुवात में सावधान रहने की जरुरत होगी उच्चारण तो ठीक करने के लिए! ये लेख क्षुल्लक ध्यानसागर जी महाराज (आचार्य विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित शिष्य) के प्रवचनों के आधार पर लिखा गया है। Freely Download Now Rare Preaching's by Various Monks like Acharya Shantisagar ji, Acharya Vidyasagar Ji, Sudhasagar ji, Kshamasagar Ji, Dhyansagar Ji & So on: www.jinvaani.org Download Freely Treasures of Online Jainism Music Resource's Bhaktamar Stotra, Puja, Stavan, Stotra, Ravindra Jain's Spiritual MP3: www.wuistudio.com [still downloaded 10,000 Times within 9 months] Page-2
SR No.212300
Book TitleNamokar Mantra Ek Anuchintan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDhyansagar
PublisherDhyansagar
Publication Year
Total Pages2
LanguageMarathi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size235 KB
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