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________________ २१४ शिवप्रसाद वि. सं. १५७२ वैशाख सुदि पंचमी सोमवार' धातु प्रतिमा पर उत्कीर्ण लेख प्रतिष्ठा स्थान-जैन मंदिर-नाणा वि. सं. १५५० में रचित सागरदत्तरास' के रचयिता यही शान्तिसूरि (चतुर्थ) माने जा सकते हैं। ईश्वरसूरि (पंचम) द्वारा प्रतिष्ठापित उपलब्ध प्रतिमाओं का विवरणवि. सं. १५६० ज्येष्ठ वदि ८ बुधवार विमलनाथ की प्रतिमा पर उत्कीर्ण लेख प्रतिष्ठा स्थान–पार्श्वनाथ देरासर, नाडोल, वि. सं. १५६७ (तिथि विहीन लेख) विमलवसही की दीवाल पर उत्कीर्ण लेख वि. सं. १५८१ पौष सुदि ५ शुक्रवार अजितनाथ की प्रतिमा पर उत्कीर्ण लेख सं. १५८१ वर्षे पोष सुदि ५ शुक्रदिने उ० शीसोद्या गौत्र गोत्रजा वायण सा० पद्मा भा० चांग पु० दासा भा० करमा पु० कमा अषाई लावेता पातिः स्वश्रेयसे श्री अजितनाथ बिंब का०प्र० श्री संडेर गणे कवि श्री ईश्वरसूरिभिः ॥ श्री ॥ श्री चित्रकूटदुर्गे । वि. सं. १५९७ वैशाख सुदि ६ शुक्रवार आदिनाथ की प्रतिमा पर उत्कीर्ण लेख प्रतिष्ठा स्थान-जैनमंदिर, नाडुलाई ईश्वरसरि (पंचम) ने अपने गुरु द्वारा प्रारम्भ किये गये साहित्यसर्जन की परम्परा को जीवन्त बनाये रखा। इनके द्वारा रचित ललिताङ्गचरित्र ( रचना काल वि. सं. १५६१), श्रीपालचौपाई ( रचनाकाल वि. सं. १५६४ ) एवं सुमित्रचरित्र ( रचनाकाल वि. सं. १५८१) १. मुनि जयन्तविजय, आबू, भाग ५, लेखाङ्क ३५८ २. देसाई-मोहनलाल दलीचन्द-जैन साहित्यनो संक्षिप्त इतिहास, पृ० ५२६ एवं जैन गूर्जर कविओ, भाग १, पृ० ९१ ३. मुनि बुद्धिसागर-पूर्वोक्त, भाग १, लेखाङ्क ४५३ ४. आबू, भाग २, लेखाङ्क ५९ ५. नाहर, पूर्वोक्त, भाग २, लेखाङ्क १४१६ ६. मुनि जिनविजय, पूर्वोक्त, भाग २, लेखाङ्क ३३६ ७. जैन गूर्जर कविओ (मोहनलाल दलीचन्द देसाई) द्वितीय संस्करण-संपा० डा० जयन्त कोठारी भाग १, पृ० २२० ८. वही, पृ० २२२ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.212095
Book TitleSandergaccha ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherZ_Aspect_of_Jainology_Part_3_Pundit_Dalsukh_Malvaniya_012017.pdf
Publication Year1991
Total Pages24
LanguageHindi
ClassificationArticle & Jain Sangh
File Size2 MB
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