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________________ संडेरगच्छ का इतिहास २०५ ईश्वरसूरि (तृतीय) के पट्टधर शालिसूरि (तृतीय) हुए। इनके द्वारा प्रतिष्ठापित २ प्रतिमा लेख आज उपलब्ध हैं, जिनकाविवरण इस प्रकार है वि. सं. १४२२ माघ वदि १२ मंगलवार' वासुपूज्य पंचतीर्थी का लेख, प्राप्ति स्थान-विमलनाथ जिनालय, कोचरों का चौक, बीकानेर वि. स. १४४६ आषाढ़ वदि १ पार्श्वनाथ की धातु प्रतिमा का लेख प्राप्ति स्थान-ऋषभनाथ जिनालय की भाण्डागारस्थ प्रतिमा, नाहटों की गवाड़, बीकानेर शालिसूरि (तृतीय) के पट्टधर सुमतिसूरि (तृतीय) हुए। इनके द्वारा प्रतिष्ठापित वि. सं. १४४२ से वि. सं. १४६९ तक के जो प्रतिमा लेख आज उपलब्ध हैं, उनका विवरण इस प्रकार है वि. स. १४४२ वैशाख सुदि ३ सोमवार प्राप्ति स्थान–अनुपूर्ति लेख, आबू वि. स. १४४३४ प्राप्ति स्थान-जैन मन्दिर, राजनगर वि. स. १४५९५ प्राप्ति स्थान-अजितनाथ देरासर, शेख नो पाडो, अहमदाबाद वि. स. १४६१ वैशाख सुदि शान्तिनाथ की प्रतिमा पर उत्कीर्ण लेख प्राप्ति स्थान-चन्द्रप्रभ जिनालय, जैसलमेर वि. स. १४६२ वैशाख सुदि ५ शुक्रवार आदिनाथ की प्रतिमा पर उत्कीर्ण लेख प्राप्ति स्थान-चिन्तामणि जिनालय, बीकानेर १. नाहटा, पूर्वोक्त, लेखाङ्क १५७४ २. वही, लेखाङ्क १४७९ ३. मुनि जयन्तविजय, आबू, भाग २, लेखाङ्क ६०० ४. जैनसत्यप्रकाश, वर्ष ९, पृ० ३८२, लेखाङ्क २० ५. मुनि बुद्धिसागर-पूर्वोक्त, भाग १, लेखाङ्क १०४१ ६. नाहर, पूर्वोक्त, भाग ३, लेखाङ्क २२८४ ७. नाहटा, पूर्वोक्त, लेखाङ्क ६०४ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org.
SR No.212095
Book TitleSandergaccha ka Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherZ_Aspect_of_Jainology_Part_3_Pundit_Dalsukh_Malvaniya_012017.pdf
Publication Year1991
Total Pages24
LanguageHindi
ClassificationArticle & Jain Sangh
File Size2 MB
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