SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 9
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ । की बातमें जब लाखा दूर देश जाता है तो अपनी प्रियतमा सोढी रानीके पास गायनके द्वारा मन बहलाने हेतु मनभोलिया नामक डूमको छोड़ जाता है । पीछेसे सोढी रानी कामातुर होकर मनभोलिया डूमको अपने महलमें रखने लगती है। यह खबर किसी तरह लाखाके पास पहुँच जाती है और एक रात वह चुपचाप आकर सोढी रानीका चरित्र देख लेता है। इस पर लाखा उसे मारनेके लिए तलवार निकालता है परन्तु अपने पूर्व वचनका स्मरण करके उसको नहीं मारता। अगले दिन सोढी रानी उसी डूमको सौंप दी जाती है। वह मनभोलियाके साथ चली जाती है। कुछ समय बाद वे दोनों पाटणमें लाखाको देखते हैं । इस समय सोढी प्रतिज्ञा करती है कि लाखाके हाथका 'सूला' खाए बिना वह अन्न-पानी ग्रहण नहीं करेगी। यह प्रतिज्ञा सुनकर लाखा अपने हाथका बनाया हुआ 'सूला' सोढीके लिए भेजता है। उसे देखते ही सोढी प्राण त्याग देती है। इस प्रकार सोढी रानी पतिको दगा देनेपर भी अन्तमें उसके व्यवहारको देखकर आत्मग्लानिके कारण अपनी जीवन-लीला समेट लेती है।' (३) काम्बलो जोईयो और तीडी खरल की बातमें-कांवला एकदम भोले स्वभावका व्यक्ति है । यहाँ तक कि उसकी सास अपनी बेटोको उसके घर भेजनेके लिए भी तैयार नहीं होती। अन्तमें किसी तरह समझाने पर वह उसे कांबलाके साथ विदा कर देती है। जब उसका गाँव निकट आता है तो उसकी पत्ती कपड़े आदि ठीक करनेके लिए ऊँटसे नीचे उतरती है और उसे कुछ दूर खड़ा होने के लिए कहती है । कांबला समझता है कि वह अकेली आ जाएगी और स्वयं घर चला जाता है। रात पड़ जाती है और तीड़ी ससुरालका घर जानती नहीं, अतः वह रोने लगती है। इसी समय एक 'धाड़ी' उधर आ निकलता है और सारी स्थिति समझकर तीड़ीको कहता है कि ऐसे व्यक्तिके साथ उसका निर्वाह नहीं होगा। यदि वह चाहे तो उसके घर चल सकती है, जहां उसे पूरा सम्मान मिलेगा। इस पर तीडी उसके साथ चली जाती है। इधर कांबला तीडीके लिए भगवां धारण करके उसकी खोजमें निकलता है और घूमते-घूमते अन्तमें उसी गांवमें चला जाता है, जहाँ तीडी रहती है । धाड़ी की अनुपस्थितिमें उनका मिलाप होता है। जब तीड़ी देखती है कि उसके लिए कांबल ने घर छोड़ दिया है तो वह उसके साथ जानेके लिए तैयार हो जाती है और इस कार्यके लिए स्वयं तरकीब भी बतला देती है। फिर कांबला अपने बहनोईके साथ वहाँ आता है और धाड़ी को अनुपस्थितिमें वे तीडीको ले भागते हैं। इस प्रकार तीडीका मन अपने पति की मूर्खताके कारण उससे फिर जाता है परन्तु अन्तमें उसके त्यागको देखकर उसका प्रेम उमड़ पड़ता है और वह भयंकर खतरा उठाकर भी उसके साथ वापिस लौट आती है।२ , मानसिक संघर्ष बातोंमें मानसिक-संघर्ष की अनेक परिस्थितियां प्रकट होती हैं परन्तु वहाँ इस प्रकारका मनोवैज्ञानिक चित्रण दृष्टिगोचर नहीं होता। वहाँ सीधे-सादे रूपमें घटना की ओर संकेत कर दिया जाता है और मनोभावों की सूक्ष्मताके चित्रण की ओर ध्यान नहीं दिया जाता। इस सम्बन्धमें कहीं-कहीं साधारण चर्चा भले ही मिल सकती है । उदाहरण देखिए (१) इतरैमें नागोर ओर बीकानेर आपसमें कजियो हवो, गाँव जखाणियाँ बाबत । सो नागेर री फोज भागी, बीकानेर री फतह हुई ।......... 'सो आ खबर अमर सिंहजी नूं गई। सो सुणत सुवां कालो १. लाखा फूलाणी री वात (हस्तप्रति, अ० ज० ग्रं०, बीकानेर) २. बातां रो झूमखो, पहलो। भाषा और साहित्य : २५३ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org.
SR No.211838
Book TitleRajasthani Bato me Patra aur Charitra Chitran
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManohar Sharma
PublisherZ_Agarchand_Nahta_Abhinandan_Granth_Part_2_012043.pdf
Publication Year1977
Total Pages11
LanguageHindi
ClassificationArticle & Society
File Size848 KB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy