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________________ राजस्थान भाषा पुर तत्व १४५ भारत में आदिम जातियों के उद्भव और विकास के सम्बन्ध में दो पक्ष हैं । एक पक्ष का मत है कि भारत की आदिम जाति का उद्भव भारत में ही हा११ 'वह कहीं बाहर से नहीं आई।१२ दूसरे पक्ष का मत है कि भारत में किसी भी आदिम मानव का उद्भव नहीं हुआ। वह दक्षिण अफ्रीका से पाया यह निग्रो-बंद्र परिवार से सम्बन्धित निग्रोइड (Negroid) या नेग्रिटो (Negrito) कहा जाता है ।१३ इस नेग्रिटो जाति के लोग बौने और काले रंग के थे। उनका कपाल दीर्घ, नाक चौड़ी और ठुड्डी ऊंची होती था। ये लोग भूमि पर से चुने हुए अन्न से अपना निर्वाह करते थे। इसी तरह ये भोजन की खोज में विचरते हुए अरब और ईरान के समुद्र तटों पर होते हुए भारत में आ पहुँचे । लगभग सात हजार वर्ष पूर्व उषः प्रस्तर युग (Eolithic) में इन लोगों ने भारत में प्रवेश किया। समुद्र तट के मार्ग से होकर पाने के कारण आबू के पास पास के पहाड़ी प्रदेश में इन लोगों ने अपना निवास किया होगा, क्योंकि उसके आसपास समुद्र तट था। इनको न तो खेती का ज्ञान था और न पशु पालन का। ये लोग भोजन की खोज में आये और पूर्व में बड़ते-बढ़ते प्रदामान द्वीपों तक पहुँच कर वहाँ बस गये । वहाँ आज भी उनकी कुछ बस्तियाँ है; जिनमें उनकी अपनी ही भाषा बोली जाती है । इन लोगों में से जो लोग राजस्थान में रह गये उनका क्या हुआ, यह निश्चय पूर्वक नहीं कहा जा सकता। इसके लिये भाषा पुरातत्व में अवशेषों की खोज की जा सकती है। यह सम्भव है कि इनके पीछे आने वाली जातियों के द्वारा ये लोग तितर-बितर कर दिये गये हों अथवा उन्हीं में मिल गये हो । निग्रोबंटु भाषा प्रवृत्तियों के अाधार पर यह खोज सम्भव है। बन्दु परिवार की भाषाएं पूर्व-प्रत्यय संयोगी (Prefix-agglutinating) होती हैं और इनमें व्याकरणिक लिंग-भेद नहीं होता। जिस प्रकार पूर्व में आसाम में तिब्बत-बर्मा परिवार के अन्तर्गत नाग जाति के लोगों में 'निग्रोबन्दु' अवशेष मिलते हैं । उसी प्रकार पश्चिम में भी बलूचिस्तान के दक्षिण में इन जातियों के अवशेष अब भी वर्तमान हैं। प्राचीन काल में उदयपुर के आसपास के पहाड़ी प्रदेशों में नागों की बस्तियाँ थी जिसके अवशेष उदयपुर के पास नागदा गांव में मिलते हैं। असम की सीमा पर वोमडिला, लाठीटिला आदि ला अन्तवाली नागों की बस्तियों के समान बस्तियों के नाम राजस्थान के इस प्रान्त में (और अन्यत्र) भी मिलते हैं, जैसे-बेदला, ऊठाला, पोटला, रायला, गटीला, गुड़ला। इन नामों के आधार पर यहाँ के लोगों की बोलियों में प्राचीन भाषा तत्त्वों के अवशेष प्राप्त हो सकते हैं। नेग्रिटो लोगों के पश्चात् भारत में प्रवेश करने वाली जाति प्राथमिक दक्षिणाकार (Proto-Austroloid) मानी जाती है। ये लोग काले और मध्यम कदवाले थे। इनका ललाट ऊंचा और मुह तथा नाक 11. "So far as known the bulk of population of India has been stationery" -Dr. Hodden-Wonderings of the People-P.25. 12. "The earliest political event in India to which an approximately correct date can be assigned is the establishment of the Shaishunag dynasty of Magadh about 642 B.C." - V.A. Smith-Early History of India'. Introduction P. 2. 13. "We have thus the Primitive Negrito tribes, probably the most ancient people to mak India their homes; no proof has yet been found that a man of any type had evolved from some kind of anthropoid ape on the soil of India. -S.K. Chaterji-Indio Aryan and Hindi'.-P.2. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.211827
Book TitleRajasthan Bhasha Puratattva
Original Sutra AuthorN/A
AuthorUdaysinh Bhatnagar
PublisherZ_Jinvijay_Muni_Abhinandan_Granth_012033.pdf
Publication Year1971
Total Pages35
LanguageHindi
ClassificationArticle & History
File Size3 MB
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