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________________ वीरजिणिवचरित १३. महावीर समकालीन ऐतिहासिक पुरुष (क) वैशाली-नरेश चेटक युत प्राकी गन्धि पाचम तथा संस्कृत उत्तरपुराण (पर्व ७५) में वैशाली के राजा चेटकका वृत्तान्त आया है। चेटकके विषयमें कहा गया है कि वे अति विख्यात, विनीत और परम आहेत अर्थात् जिनधर्मावलम्बी थे । उनको रानीका नाम सुभद्रादेवी था। उनके दश पत्र हर-धनदत्त, धनभद्र, उपेन्द्र, सुदत्त, सिंहभद्र, कुम्भोज, अकम्पन, पतंगत, प्रभंजन और प्रभास । इसके सिवाम इनके सात पुषियां भी थीं। सबसे बड़ी पुत्रीका नाम प्रियकारिणी था जिसका विवाह कुण्डपुर नरेश सिद्धार्थ से हुआ था और उन्हें ही भगवान महावीर के माता-पिता बननेका सौभाग्य प्राप्त हुआ। दुसरी पुत्री थी मगावती जिसका विवाह वत्सदेशको राजधानी कौशाम्बीके चन्द्रवंशी राजा शतानीकके साथ हुआ। तीसरी पुत्री सुपमा दशाण देश ( विदिशा जिला ) की राजधानी हेमकभके राजा दशरथको व्याही गयी । चौथी पुत्री प्रभावती कच्छ देशकी रोरुका नामक नगरी के राजा उदयनकी रानी हुई। यह अत्यन्त शीलवता होनेके कारण शीलवतीके नामसे भी प्रसिद्ध हुई। चेटककी परिवों पुत्रीका नाम ज्येष्ठा था। उसकी याचना गन्धर्व देशके महीपुर नगरवर्ती राजा सात्यकिने की। किन्तु चेटक राजाने किसी कारण यह विवाह सम्बन्ध उचित नहीं समझा । इसपर क्रुद्ध होकर राजा सात्यकिने चेटक राज्यपर आक्रमण किया 1 किन्तु वह युद्धमें हार गया और लज्जित होकर उसने दमवर नामक मुनिसे मुनिदीक्षा धारण कर ली । ज्येष्ठा और छठी पुत्री चेलनाका चित्रपट देखकर मगधराज श्रेणिक उनपर मोहित हो गये, और उनकी याचना उन्होंने चेटक नरेशसे की। किन्तु श्रेणिक इस रामय आयुमें अधिक हो चुके थे, इस कारण चेटकने उनसे अपनी पुत्रियोंका विवाह स्वीकार नहीं किया। इससे राजा थेणिकको बहुत दुःख हुआ। इसकी चर्चा उनके मन्त्रियोंने ज्येष्ठ राजकुमार अभयकुमारसे की । अभयकुमारने एक व्यापारीका वेष धारण कर वैशालीके राजभवनमें प्रवेश किया, और उक्त दोनों कुमारियोंको राजा श्रेणिकका चित्रपट दिखाकर उनपर मोहित कर लिया। उसने सुरंग मार्गसे दोनोंका अपहरण करनेका प्रयल किया। चेलनाने आभूषण लानेको बहाने ज्येष्ठाको तो अपने निवास स्थानकी और भेज दिया और स्वयं अभयकुमारके साथ निकलकर राजगृह आ गयी, तथा उसका श्रेणिक राजा से विवाह हो गया। उधर जब ज्येष्टाने देखा कि उसकी बहन उसे धोखा देकर छोड़ गयी तो उसे बड़ी विरक्ति हुई और उसने एक आयिकाके पास जिनदीक्षा ग्रहण कर ली। पेटककी सातवीं पुत्रीका नाम चन्दना
SR No.090534
Book TitleVeerjinindachariu
Original Sutra AuthorPushpadant
AuthorHiralal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1974
Total Pages212
LanguageHindi, Apbhramsa
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size3 MB
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