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________________ [ ०२४ धर्मादि चार शुद्ध द्रव्यों की पर्याय (चार्ट नं० २) धर्म द्रव्य अधर्म द्रव्य । आकाश द्रव्य काल द्रव्य स्वभाव अर्थ पर्याय स्वभाव अर्थ पर्याय स्वभाव अर्थ पर्याय स्वभाव अर्थ पर्याय अगुरु लघु गुण निमित्त के | अगुरु लघु गुण निमित्तक । अगुरु लघु गुण निमित्तक षड् | अगुरु लघु गुण निमित्तक षड् षड् हानि वृद्धि स्वरूप | षड् हानि वृद्धि रूप प्रत्येक | स्थान पतित हानि वृद्धि रूप | हानि वृद्धि रूप प्रत्येक समय प्रत्येक समय का परिणमन __ समय का परिणमन प्रत्येक समयवर्ती परिवर्तन का परिणमन सुखबोधायां तत्त्वार्थवृत्ती स्वभाव गुण पर्याय ! स्वभाष गुण पर्याय स्वभाव गुण पर्याय स्वभाव गुण पर्याय गति हेतुत्वादि गुणों का | स्थिति हेतुत्व आदि गुणों | अवगाहना हेतुत्वादि गुणों का | वर्तना हेतुत्वादि गुणों का परिणमन का परिणमन परिणमन परिणमन स्वभाव द्रव्य पर्याय स्वभाव द्रव्य पर्याय स्वभाव द्रव्य पर्याय स्वभाव द्रव्य पर्याय लोकाकाश प्रमाण फैलकर अनादि से स्थित जो प्राकार है लोकाकाश प्रमाण फैलकर अनादि से स्थित जो प्राकार है समघन चतुरस्र सर्वत्र अनन्त प्रदेश प्रमाण अवस्थान परमाणु के आकारवत् कालाणु का जो अवस्था का प्राकार है वह।
SR No.090492
Book TitleTattvartha Vrutti
Original Sutra AuthorBhaskarnandi
AuthorJinmati Mata
PublisherPanchulal Jain
Publication Year
Total Pages628
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Tattvartha Sutra, Tattvartha Sutra, & Tattvarth
File Size18 MB
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