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________________ xx मध्यमस्याद्रादरहस्ये खण्डः : * विषयमार्गदर्शिका * पृष्ठ विषय पृष्ठ .. . . 2 विषय | रामरुद्रभट्ट-नृसिंहमतसमालोचना | आकाशादि में विदोष की सिद्धि नामुमकिन - स्याद्वादी ५११ दिनकरीयतरङ्गिणीमतरखण्डनम् द्रव्य ही व्यावृत्तिस्वभाववाला है . स्वाद्वादी । अभिलाप्यत्व और अनभिलाप्यत्व में अविरोध . स्पाद्वादी ५१३ अनभिलाष्य अर्थ भी कधंचित् अभिलाप्य है - स्याद्वादी ५१३ । बृहन्कल्पभाष्यवृत्त्यादिसंवादः अभिलाप्यत्वपदार्थपरीक्षा 'सर्वे शब्दाः सर्वार्थवाचकाः सति तात्पर्ये' इत्यत्र मीमांसा ५१६ | अनभिलाष्यत्वे विकल्पञ्चकासहत्वाशका अभिलाप्यानामपि थुनानिबद्धत्वावेदनम् अभिलाप्यत्वनिर्वचनम् शब्द और अर्थ में कथंचित् भेदाभेद - स्याद्वादी सकेतानुसारेण शब्दार्थतादात्म्यपरिणामः अभिलाप्यत्वे मीमांसा कथंचित् अर्थपरिणत शब्द संकेतज्ञानसहकार से बोषजनक है . स्याद्वादी कंवली श्रुतविषयभूत अर्थ के ही प्रतिपादक है प्रातिस्विकरूपमीमांसा केवलिनि वाग्पोगरूपं श्रुनज्ञानम् कवली में क्षायिक श्रुतज्ञान नामुमकिन ५२३ कवलिनी शेपज्ञानचतुष्कसद्भावमीमांसा ५२५ तत्त्वार्थश्लोकवार्तिककारमतालोचनम् | बिससापरिणाम से केवलिदेशना . दिगंबरमत केवलिना शब्दाऽप्रयोक्तृत्वमाशाम्बरमते दिगम्बरमतनिसकरणम् वीतरागेऽप्पनुजिघृक्षासद्भावोपपादनम् ५२८ शुद्धेच्छाया रागत्वाऽयोगोपपादनम् तत्वार्धशोकवार्तिकवचनखण्डनम् | एक धर्मी में अनेकवर्णसमावेश प्रामाणिक विरुद्धवर्णानामेकत्र सवसमर्धनम् अवयवगत विविधवर्ण का अवयत्री में भान अप्रामाणिक . स्याद्वादी उपाधिभेदानित्यवानित्यत्वादीनामेकत्र समावेशः स्वादादानुसार चित्रवत्र्यवहार मुमकिन न्यापखण्डखाद्यविरोधपरिहारः ५३३ सातवें श्लोक की अन्य व्याख्या ५३३ परस्परानधिकरणवृत्तिजातीयत्वं न विरुद्धत्वम् १३४ स्वरूपासिद्धिनिराकरणम् ५३५ नित्यानित्यत्व जातिविशेषस्वरूप है . स्याद्वादी सांकर्य जातिबाधक नहीं है - स्याद्वादी ५३६ नरत्वसमाविष्टसिंहत्वं = नरसिंहत्वम् ५३७ साइय॑स्य जात्यबाधकलनिरूपणम् ५३८ नरत्याभाउसमानाधिकरण सिंहत्वत विरोधितानबच्छेदक । उत्पादादिसिद्धिसंवादेन सामान्यविशेषाऽविरोधप्रदर्शनम् सामान्य और विशेष परस्पराऽविरुद्र एवं वस्तुदेश है - स्पाद्वादी सामान्य-विशेषयोः समुद्रोदाहरणेन वस्त्वंशवसमर्थनम् ५४. तत्त्वसङ्ग्रहकारमतसमालोचना सन्तानित्वेन जात्यन्तरत्वख्यापनम् चित्र पट में नीट पीतादिवर्ण परपरानुविद्वस्वभाववाल होते हैं ५४२ अतिरिक्तचित्ररूपानङ्गीकारः ५४३ चित्र रूप सर्वथा अतिरिक्त नहीं है चित्रपदप्रवृत्तिनिमित्तनिरूपणम् रूपविशिएरूपत्व चित्रपप्रवृत्तिनिमित्त है - स्याद्वादी ५४४ विवरणेऽपीनरुक्त्यम् ५४५ आठवीं कारिका की व्याख्या वीतरागस्तोत्रावचूण्ादिसंबादः ५४६ ज्ञानाद्वैतसिद्धि ५४६ ज्ञानाईतप्रतिपादने प्रमाणवार्तिकादिसंवादः ५४७ योगाचार का स्यादाद में प्रवेश स्याद्वादस्याऽनिराकार्यता ५४८ ५४७
SR No.090487
Book TitleSyadvadarahasya Part 2
Original Sutra AuthorYashovijay Upadhyay
Author
PublisherDivya Darshan Trust
Publication Year
Total Pages370
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size17 MB
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