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________________ 105 घाणेन्द्रि गानि नमस्कार उग्याडितूण जिंघितो, मतो य, एवं दुक्वाय धाणेदियं । व्याख्याया । जिभिदिए उदाहरण-सोदामा राया मंसपितो, अमाघातो, सुयस्म मम बिगलेण गहितं, माकरिएसु मग्गिय, ण लद्धं, पच्छा यादिषु डिंभरूब मारिय मुमंभितं, जिमिनो, पुलति-कहिने पुरिमा दिण्णा मारेहिचि, णगरण जातो भिच्चेहि य, रक्खसोति मधुं पाएगा। उदाहर॥५३४॥ अडवीए पविट्ठी, नच्चरे ठितो गयं गहाय दिणे २ माणुम मारेनि, केह मणति-विविहजणं मारेति, तेणतण सत्थो जाति, तेणी सुनेण न चेइओ, साधू य आवस्मयं करेंना फिडिया, ने द? ओलग्गति, तबतेएण ण सकति अल्लिइतु, चिंतेति, धम्मकहणं, पच्च| ज्वा. अने मानि-मो भणति बच्चने-ठाह, साहू भणनि अम्हे ठिया, तुम ठाहि, विनीत, संयुद्धो, सातिशया आयरिया ने ओहिXणाणी, केत्तियाणमवं होतित्ति । एवं दुक्खाय जिभिदियति । # फासिंदिरा उदाहरण-चमनपुरे णगरे जियसत्तू राया, मुमालिया मे मज्जा, अनीव सुकुमालो फासो, राया रज्जवचितेति, यसो ताण णिच्चमेव परि जमाणो संवाहिज्जमाणो य तीमे फासे मुच्छितो अच्छति, रायकज्जाणि ण चिंतेति, एवं कालो | वच्चति, मिच्चेहि स मंतेतूण तीए सह निच्छटो, पुत्तो से रज्जे ठवितो, ते अडवीए वन्नति, सा तिसाइया, जलं मग्गियं, | अच्छीणि से बदाणि, मा विभेहित्ति, मिरारुधिरं पज्जिया, रुघिरे मूलिया छुढा जेण ण थिज्जति, छुघाइयाए ऊरुमंस दिण्ण, 2 | अरुगं संरोहणीए रोहिये, जणत्रय पत्ताणि, आमरणगाणि सारवियाणि, एगत्थ वाणित करेति, पंगू व से वीधीसोधगो पडितो, I maan सा भणति-ण सक्कुणोमि एगागिणी गिहे चिट्टितुं, चितिज्जयं लमाहि, चिंतियं चणेण-णिरवातो पंगू सोभणो, ततो गेण पालो [णिउत्तो, तेण गीतच्छलितकथादीहिं आवज्जिया, पच्छा तस्सेव लग्मा, मचारस्स छिदाणि मग्गति, जाहे ण लमति ताहे उज्जा SON
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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