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________________ १ ॥ ACH दशका रा ॐ प्रज्वाल्य पश्चिाग्नि, प्रसिंच्याम्य म्टतनिलि ॥ हप्तयः परही महाहीना, सहस्त्राणांच तावतां ॥ नाग दर्धः ॥ ॐ तिष्ठन्तं कमठस्य निष्ठुरतरे, पृष्ठे धराशा प्रभु ॥ नागेन्द्र फए चक्र बाल मणिमि, यस्तांधकारोदयं ॥ आरक्त द्विसहस्त्र लोचनमुखं, कर करोम्यग्रत ।। स्तन्नाम्नैव मनु पियेण बहुधा, गधेन संप्रीयतां ॥ पागाः ।। ॐ अधररयां दिशि कठिन चक्रा कारोन्नत मध्य पृथु पृष्ठकं कुल सामथाष्ट गुण शरीर सामर्थ, चार चरण संचरण पराजित पवन रभसं, कूर्मराज पृष्ठमारूद, शिर सहस्त्र चूड़ामणि मरीचि बिडवित, शस्त्समय विमल नक्षत्र चा: स्थूल स्फूर्त मुक्ताफल हारासंकृत, परीत कंठ कंदलं सपद्मावति परिजनं, भूत धात्री धरणं धरणेन्द्रदेव, समानानयामहे ॥ स्वाहा ॥ ॐ धरणेन्द्र देव आगच्छ धरणेन्द्राय स्वाहा ॐ दर्भकांड समादाय, विश्वपिनौवखंडनम् ।। हिपामि बम्हणः स्थने, भक्त्या वाह्यं महामहे ॥ मोम दई ॥ ॐ उध्वयां दिशि सिंह दाहन मुड वातानु नातं स्फुरत् ॥ कांति कैरबदाम रम्य वपुष सोम, सविश्या समम् ॥ श्रत्युग्न ग्रहमण्डलस्य सकल, व्योमैक चूडामधिं ॥ पूजाया गपये प्रतीच्छतुतरा मे, पोत्रगंधादिकम् ॥ पायाधं ॥
SR No.090446
Book TitlePraching Poojan Sangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRam Chandra Jain
PublisherSamast Digambar Jain Narsinhpura Samaj Gujarat
Publication Year
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size6 MB
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