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________________ urr Rull ६७ ॐ ह्रीं पड़ विंशनि कोटी पद प्रमाण कन्याण बाद पूर्वाय नमः । ६८ , त्रयोदश कोटि पद प्रमाण प्राणानुवाद पूर्वाप नमः । ६६ , नब कोटी पर प्रमाण किया विशाल पूर्वाय नमः । ७० , सार्द्ध द्वादश कोटी पद प्रमाण लोक विन्दु पूर्वाय नमः । ६ चतुर्दश गुणस्थान मंत्र ७१ ॐ ह्रीं मिथ्यात्व गुणास्थान स्थितानंत मन्य जीव गराये नमः । ७२ ,, सासादन गुणस्थान पति सम्यग्दृष्टि जीव राशये नमः । ७३ , मित्रगुणस्थान स्थित भर जीव सम ।। ७३ , अग्नि गुण, स्थान स्थित सम्यग्दृष्टि भव्य जीव राशये नमः । " देशवत गुरुस्थान स्थित भव्य जीव राये नमः । , अमन गुणस्थान स्थित मुनिभ्यो नमः । अप्रम न गुणस्थान स्थित मुनिभ्यो नमः । , अर्ष करण गुणस्थान श्रोणि द्वय मुनिभ्या नमः । , अनिवृति करण गुणस्थान स्थित मुनिभ्यो नमः । ८० , सूक्ष्म साम्पसय गुण स्थान स्थित भुनिभ्यो नमः । ८१ , उपशांत कपाय गुपस्थान स्थित मुनिभ्यो नमः । ८२ , क्षीण कषाय गुणस्थान स्थित मनिराशय नमः । - - - - LATED 11१६७ -
SR No.090446
Book TitlePraching Poojan Sangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRam Chandra Jain
PublisherSamast Digambar Jain Narsinhpura Samaj Gujarat
Publication Year
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size6 MB
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