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________________ १६॥ ', कन्दोन्प्रथकाय श्री मुपार्श्व तीर्थंकराय नमः । , श्री चन्द्रमा नीशाय नमः । # श्री पुष्पदंत तीर्थकराय नमः । , श्री शीतलनाथ तीर्थ कराय नमः ! श्री श्रेयांस तीर्थ कराय नमः । ., श्री वासुपूज्य शीर्थ कराय नमः । , श्री विमल नाथ तीर्थंकराय नमः । , श्री अनंत नाथ तीर्थ कराय नमः । २ चतुर्दश प्रकीर्णक मंत्र ५५ ॐ ही सामायिक क्रिया युक्त मुनये नमः १६ । चतुर्विंशति जिन स्तुति प्रतिपादकाय मुनयेनमः । ,, त्रिकाल देख वंदना युक्त मनये नमः । , प्रतिक्रमण क्रियायुक्त मुनये नमः । १६ , गुर्शदिक धर्मऋद्धि विनय क्रिया युक्त मुनये नमः । दक्षाग्रहण शिक्षादि युक्त मुनये नमः । २१ , दशकालिकोपदेशकाय मुनये नमः । ॥१६
SR No.090446
Book TitlePraching Poojan Sangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRam Chandra Jain
PublisherSamast Digambar Jain Narsinhpura Samaj Gujarat
Publication Year
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size6 MB
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