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________________ १२ बोतित रत्न कदम्बक दीपाः, रंजुर रंवर नाक महीपा | फाल्गुण. " ७ ॥ भूषित पेशल गंध सुरुषाः रेजुरहव घृत मोहन रूपा ॥ कामु ८ ॥ sofia are rare कदंबाः रेजुरईल कश्मल दंभाः ॥ फाल्गुण ६ ( वसंत तिलका ) नन्दीश्वरोत्तर गतांजन मुरुष शैल, बहीन्दु मान शिखर स्थित चैत्य संस्था । वेदाभ्र वेद कुमिता प्रतिमा जिनानां संपूजयामि जलजादत चन्दनाद्यः ॥ ॥ महार्घ्यम् ॥ ॥ समुच्चष्याटक ॥ 2 विमल कांचन कुंम विनिस्सरत्प्रचुर कुकुम पिंजर वारिणा । रस हिमांशु रसेषु वितांश्चतान, जिनवरान्दिव साष्टक पूजयेत् ॥ जलम् ॥ शुभ हरिन्मणि संस्थित कु कुनैः, रस त वि नाल गतास्यैौ । रसहि || चन्दवम् ॥ कनक पात्र गोज्वल तन्दुलै, विधुकरै रिव नैषय संगतैः ॥ रस६ि० ।। अक्षतम् सलिल अन्य कदम्बक चंपक, अमर घोरिणि पीतपराग हैः ॥ रसहि० ॥ पुष्पम् ॥ हरिहविः सम पास संचयैः घृत वरे रसैः रसनेष्टकैः ॥ रसदि० ॥ नैवेद्यम् ॥ free पाप समोर नाशकै मुनि विवोध सबै मखि दीपकैः ।। रसहि, ।। दीपम् । त्रिवि मार्ग मतैरगुरुद्भवैः सुरभी धूम भरै भ्रमर मियैः || २सहि० क्रमुक दाड़िम चोच लतोभवैः रस विशेष युतै मधुरैफलैः ॥ रर. हि ॥ धूपम् ।। फलम् । ॥१२८||
SR No.090446
Book TitlePraching Poojan Sangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRam Chandra Jain
PublisherSamast Digambar Jain Narsinhpura Samaj Gujarat
Publication Year
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size6 MB
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