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अध्याय : दसवा ]
[ ८१६ प्रमाणित होता है कि महिलाए भी भगवान का अभिषेक कर सकती है। ये अभिषेक बड़े-बड़े प्राचार्यों के और एलाचार्य सिद्धान्त चकवर्ती विद्यानन्दजी महाराज व बड़े-बड़े भट्टारकों के व बड़े बड़े विद्वानों और श्रीमंतों के सामने हुआ था और महिलाओं ने भी किया था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उनकी श्रीमती ने भी भगवान का अभिषेक किया था । पूर्व प्राचायों कृत शास्त्रों में भी प्रमाण मिलते हैं, इन्द्राणी ने भी जिनेन्द्रदेव का अभिषेक किया था।
ततः सुरपति स्त्रियोजिन भुपेत्य शच्यादयः । सुगंधित नु पूर्वकै मदुकरा समुद्वर्तनं ।। प्र चक्र रषिंचनं शुभपयोसिरुवर्धटैः । पयोधर भर निजे रि व समंसमा वजितैः ॥१६३५॥
हरिवंशपुराण, सर्ग अष्टात्रिंशः संपादक, डा. पं. पनालालजी साहित्याचार्य
सुमेरू पर्वत पर इन्द्र के अभिषेक करने के साथ इन्द्राणों ने भी घड़ों से भगबान का अभिषेक किया।
गृहीत मंध पुष्पादि प्रार्चनाः स परिच्छवा। . प्रकबा जगाम मैषाप्रातरेय जिनालयम् ॥ त्रिःपरोल्य ततःस्तुत्वा जिनांश्च चतुराशया। संस्नात्वा पूजायित्वा च प्रयाता यति संसयि ॥१६३६।।
गुरण भद्राचार्य, जिनदत्त चरित्र सर्ग १ अर्थकदासुता सा च सुधी मदन सुन्दरी। कृत्वा पंचामृतः स्नान जिनानां सुख कोटिदम् ॥१६३७॥
श्रीपाल चरित्र, बृहन्नेमिचंद्रकृत सदा वृषभसेना छ प्राप्य राज्ञी पदं महत् । दिव्या भोगान्प्रभुजाना पूर्व पुण्य प्रसावतः ॥१६३८।।.. पूजयंती जगत्पूज्यान जिनान् स्वर्गपवर्गवान् । दिव्यरष्ट महाद्रव्यैः स्नपनादिभिरूज्वलः ॥१६३६।।
मा. कथाकोष, तीसरा भाग पृष्ठ ४२१ इसी प्रकार संस्कृत श्लोकों से सिद्ध होता है कि इन्द्राणी और मदन सुन्दरी और वृषभसेनादि स्त्रियों ने भगवान जिनेन्द्र देव का अभिषेक किया था।
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