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कौन-कौन से तीर्थकाल में हुए ।
नारायणों का जो काल है, वही इन प्रतिनारायणों का समझना
चाहिये ।
आगे कौन सी गति प्राप्त की है ?
सूचना-६ प्रतिनारायाण
४.
७ नरक गये।
६ वें
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[ गो. प्र चिन्तामरिए
भविष्यत्काल में होने अतीत काल के वाले प्रतिनारायणों के नाम
६ प्रतिवासु देवों के नाम
५
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श्री कंठ
हरिकंठ
नीलकंठ
अवकंठ
सुकंठ
शिखिकंठ
अस्वग्रीव
हयग्रीव
मयूरग्रीव
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निशुभ
विद्युत्प्रभ
धनरसिक
मनोवेग
चित्रवेग
यह प्रतिनारायण पद नरक में से आने वाले जीवों का भी प्राप्त नहीं हो सकता है
२.
ये सब ही प्रतिनारायण अधोगामी अर्थात् अधोलोक जाने वाले होते हैं । इनमें जरासंध भूमि गोचरी थे, बाकी सब विद्याधर थे ।
रावण की लंका कहाँ है ? वर्तमान सिंहलद्वीप को बहुत से लोक 'लंका' म है, परन्तु इसे रावण की लंका नहीं समझना चाहिये । लवणोदधि समुद्र में सात सौ योजन लम्बा चौड़ा एक 'राक्षस' नाम का द्वीप है, उस द्वीप के मध्य भाग में मै पर्वत के समान 'fafe कूट' अथवा 'चित्रकूटाचल' नाम का एक पर्वत हैं । वह पर्वत योजन ऊँचा और ५० योजन सम्बा चौड़ा है। उस पर्वत पर ३० योजन प्रमाण 'लंका' नाम की नगरी अत्यन्त
दृढ़रथ
वज्र जंघ
विद्युदन्ड
प्रल्हाद