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तीर्थंकरों का तीर्थप्रवर्तन काल (मोक्षमार्ग प्रवर्तनकाल) प्रमारण
७६६ ।
तीर्थकर का
तीर्थ प्रवर्तन काल
५० लाख करोड़ सागरोपस + १ पूर्वात प्रमाणकाल तक रहा
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ऋषभ नाथ अजितनाथ संभवनाथ अभिनन्दन सुमतिनाथ पात्रम सुपाव नाव चन्द्रमा
१० हजार करोड़ सामरोफम
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६०० करोड़ सागरोपम
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पुष्पदन्त
२८ पूर्वाङ्ग + पस्य का चौथा भाग से हीन (कम) और ६ करोड सागरोपम से अधिक अर्थात् १६९ERSEE सागर और EEEEEEEEEEEEEEE ३/४ पल्प में से २२ पूर्वाङ्ग + एक लाख पूर्व बटाने पर जो धाकी रहेगा उतना काल प्रमाण समझना चाहिये।
१० शीतलनाथ
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प्राधा पल्यापम और १०० सागर वग एक करोड़ साय रोगम प्रमाण काल से अतिरिक्त समझता चाहिये । अर्थात् ६६६६६६ सागर और ६६ECREEcle TEEEE१/२ पस्य इससे अतिरिक्त काल का प्रमाण ६६२६००० वर्ष कम २५००० पूर्ण है, ऐसा समझना चाहिये।
[ गो. प्र.चिन्तामणि
११
श्रेयांसनाथ
५४ सागरोपम+२१ लाख घरों में से ३/४ पल्प कम इतना भान ब्रमाण समझना चाहिये।
१२ वासुपूज्य
३० सागरोपम+५४ लाख वर्षों में से १ पल्प कम