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क्रमांक बन जायें के नाम
१
३
५
८
ε
१०
११
१२
*
ज्ञान के
""
उम्र बन
शुकदावन 'वट वृक्ष
(सर) सहेतुकबन
योजन वृक्ष (वृक्ष) प्रमाण
५४
73
तीर्थकरों के केवलज्ञान - ज्ञान कल्याणक
समवशरण का विस्तार
मनोहर बन
सहेतुकजन शिरीष
"
११०३ सप्त व शाल्मली ११
वैशाल
१००
शिव
१०
सर्वाथ बन
पुष्पक वन
मनोहर व far क्ष
भाग वृक्ष
अक्ष (बहेड़ा)
दाण
कदम्ब
५५
१२
おい
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ए
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獎
६३१
समवारय
कोस में तीर्थकर भगवान STRTIG श्रासन ५ভ
५६
祝月
४६
४४
생명수
४२
*
३८
३६
३४
३२
१०
२५
२६
समर में तब ही तीर्थकर भगवान पप्रासन से ही विराजमान होते हैं
मनदर में रहने वाले सात प्रकार के मुनीश्वरों का मंत्र और उनकी संख्या
सामान्य केवलियों की संस्था
५. ८८
२००००
२००००
१५०००
१६०००
१३०००
१२०००
११०००
८०००
७५०७
७०००
६५००
६०००
पूर्वपरियो की संख्या
५६
४१५०
शिक्षक दिपुलवि की मति ज्ञानियों संख्या । की संख्या
६०
४१५० १२७५०
३७५०
२१६०
२१५० १२६३००
२५०० २३००५०
२४००
२५४३५०
२३०० २६६०००
२०३० २४४९२०
४००० २१०४०० ८००० १५०० १५५५००
७५००
१४००
५१२००
७५००
विक्रिया अवज्ञानियों की श्रद्धियों को संख्या i संख्या
६२
| ६३
१२४५०
२०४०७
१२१५०
१६८००
१२६५०
१६०००
१०४०० १८४००
१०३०० १६०००
१५०
१३००
४६२०० ६००० १२०० ३६२००
६०००
२०६००
१०६००
१३०००
8003
१२०००
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१६००
११०००
१००००
१५३०० ६०००
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८४००
७२००
११००० ६००० १०००० ५४००
७५४ ]
[ गो. प्र. चिन्तामरि