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________________ [ १३ - जिस कर्म के उदय से अनेक प्राणियों में श्रविरोधी समान अवस्था प्राप्त होती है, उसे जाति नाम कर्म कहते हैं । अध्याय: पहला ] उत्तर प्रश्न - जाति नाम कर्म के कितने भेद हैं ? उत्तर :--पांच भेद हैं- एकेन्द्रिय जाति, द्वीन्द्रिय-जाति, श्रीन्द्रिय जाति, चतुरिन्द्रिय• जाति और पञ्चेन्द्रिय-जाति । प्रश्न :- - एकेन्द्रिय जाति नामक किसे कहते हैं. ?. उत्तर :- जिस कर्म के उदय से जीव एकेन्द्रिय-जाति में पैदा होता है, उसे एकेन्द्रियजाति नाम कर्म कहते हैं । प्रश्न : -वीन्द्रिय जाति नाम कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से जीव द्वीन्द्रिय जाति में पैदा होता है, उसे द्वीन्द्रियजाति नाम कर्म कहते हैं । - त्रीन्द्रिय जाति नाम कमें किसे कहते हैं। ? प्रश्न उत्तर :- जिस कर्म के उदय से श्रीन्द्रिय-जाति में जोव का जन्म होता है, उसे श्रीन्द्रिय जाति नाम कर्म कहते हैं । प्रश्न :- चतुरिन्द्रिय-जाति नाम कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से जीव का चतुरिन्द्रिय-जाति में जन्म होता है, उसे चतुरिन्द्रिय-जाति नाम कर्म कहते हैं । प्रश्न :- पंचेन्द्रिय-जाति नाम कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से जीव का पंचोन्द्रिय-जाति में जन्म होता है, उसे पंचेन्द्रिय-जाति नाम कर्म कहते हैं । प्रश्न :- शरीर नाम कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--- जिस कर्म के उदय से जीव के शरीर की रचना होती है, उसे शरीर नाम कर्म कहते हैं । प्रश्न :- शरीर नाम कर्म के कितने भेद हैं ? उत्तर :-- शरीर नाम कर्म के ५ (पांच) भेद है। श्रदारिका वैकियक, आहारक, . तेजस श्री कार्मारण ये ५ शरीर नाम कर्म के भेद हैं 1. प्रश्न : श्रदारिक शरीर नाम कर्म किसे कहते हैं ?
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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