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________________ % 3 R in-SA MA am -renuintamarma-mastadarriasisemini--- ५३० । [गा. प्र. चिन्तामणि .. चौबीसवें पटल में सोलह कोड़ा-कोड़ी पल्प की आयु है । पच्चीसवें पटल में १६६६६६६६६ करोड़ पल्य और ६६६६६६६, २ बटे ३ पल्य की आयु है। . छब्बीसवें पटल में १७३३३३३३३ करोड़ पल्य और ३३३३३३३, १ बटे ६ पल्य की आयु है। सत्ताईसमें पटल में अठारह कोड़ा-कोड़ी पल्य की प्रायु है। अट्ठाईसमें पटल में १८६६६६६६६ ६करोड़ पल्य प्रौर ६६६६६६६, २ बटे ३ पल्य की आयु है। उनतीसवें पटल में १६३३३३३३३ करोड़ पल्य और ३३३३३३३, १ बटे ३ घल्य की प्राय है। तीसवें पटल में बीस कोड़ा-कोड़ी पल्य की आयु है। इकतीसवें पटल में कुछ अधिक दो सागर की प्रायु है ।। सानत्कुमारमाहेन्द्रयोः सप्तः ॥१२३७।। सानत्कुमार और माहेन्द्र में स्वर्ग में देवों की आयु कुछ अधिक सात सागर है । प्रथम पटल में २,५ बटे ७ सागर, द्वितीय पटल में ३, ३ बटे ७ सागर, तीसरे पटल में ४, १ बटे ७ सागर, चौथे पटल में ४, ३ बटे ७ सागर, पांचवें पटल में ५, ४ बेटे ७ सागर, छठवें पटल में ६, २ बटे ७ सागर और सातों पटल में कुछ अधिक सात सागर की आयु है। त्रिसप्तनवैकादशत्रयोदश पञ्चदश भिरधिमानि तु ।।१२२८।। ब्रह्म और ब्रह्मोत्तर स्वर्ग में दश सागर के कुछ अधिक, लान्तब और कापिष्ट स्वर्ग में चौदह सागर से कुछ अधिक, शुक्र और महाशुक्र में सोलह सागर से कुछ अधिक, शतार और सहस्त्रार में अठारह सागर से कुछ अधिक, आनंत प्राणत में बीस सागर और प्रारण और अच्युत में बाईस सागर की उत्कृष्ट प्रायु है । इस सूत्र में 'तु' शब्द यह बतलाता है कि पूर्व सूत्र के 'अंधिके' शब्द की अनुवृत्ति सहस्त्रार स्वर्ग पर्यन्त ही होती है । अतः प्रागे के स्वर्गों में श्रायु सागरों से कुछ अधिक नहीं है । ब्रह्म और ब्रह्मोत्तर स्वर्ग के प्रथम पटल में ७, २ बटे ४ सागर, द्वितीय पटल में ८, १ बटे २ सागैर, तीसरे पटल में ६,१ बटे.४ सांगर और चौथे ऐटल में देशं सागर से कुछ अधिक पायु है। - - --AADAK REPOnlin e ----
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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