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________________ अनाम : साता [ ५०३ उत्तर के क्षेत्रों में प्रायु की व्यवस्था-- तथोत्तराः ॥११८६ उत्तर के क्षेत्रों के निवासियों की प्रायु दक्षिण क्षेत्रों के निवासियों के समान ही है । अर्थात् हैरण्यवत, रम्यकक्षेत्र तथा उत्तर कुरु में उत्पन्न होने वाले प्राणियों की आयु कमशः एक, दो और तीन पल्य की है । विदेह क्षेत्र में वायु को व्यवस्था विवेहेषु संख्येयकालाः ॥११६०॥ विदेह क्षेत्र में संख्यात वर्ष की आयु होती है। प्रत्येक मेरु सम्बन्धी, पांच पूर्व विदेह और पांच अपर विदेह होते हैं । इन दोनों विदेहों को महाविदेह कहते हैं । विदेह में उत्कृष्ट प्रायु पूर्व कोटि वर्ष जघन्य आयु अन्त मुहूर्त है । विदेह में सदा दुषमा सुषमा काल रहता है। मनुष्यों के शरीर की ऊँचाई पांच सौ धनुष है । वहाँ के मनुष्य प्रतिदिन भोजन करते हैं। ___ सत्तर लाख करोड़ और छप्पन हजार करोड़ वर्षों के समूह का नाम पूर्व है । अर्थात् ७०५६०००००००००० वर्ष का पूर्व होता है । भरत क्षेत्र का दूसरी तरह से विस्तार वर्णन भरतस्य विष्कम्भो जम्बूद्वीपस्य नवतिशतभागाः ॥११६१॥ भरत क्षेत्र का विस्तार जम्बू द्वीप के एक सौ नम्वेचा भाग है। अर्थात् जम्बू द्वीप के एक सौ नन्दे भाग करने पर एक भाग भरत क्षेत्र का विस्तार है ।। जम्बूद्वीप के अन्त में एक वेदी है, उसका विस्तार जम्बूद्वीप के विस्तार में ही सम्मिलित है। इसी प्रकार सभी द्वीपों की बेदियों का विस्तार द्वीपों के विस्तार के अन्तर्गत ही है । लवण समुद्र के मध्य में चारों दिशाओं में पाताल नाम वाले अलजलाकर चार बड़वानल' हैं, जो एक लाख यौजन गहरे, मध्य में एक लाख योजन विस्तार युक्त और मुख तथा मूल में दश हजार योजन विस्तार वाले हैं। चारों विदिशाओं में चार क्षुद्र बड़वानल भी है । जिनकी गहराई दश हजार योजन, मध्य में विस्तार दश हजार योजन और मुख तथा मूल में विस्तार एक हजार योजग है। इन आठ बड़वानलों के आठ अन्तरालों में से प्रत्येक अन्तराल में पंक्ति में स्थित एक सौ पच्चीस बाडव हैं जिनकी गहराई एक हजार योजन, मध्य में विस्तार एक हजार प्रोजन और मुख
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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