SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 53
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ चतुविशति तीर्थङ्करेभ्यो नमो नमः नेमिनाथ स्वामिनं नत्वा, नत्वा बाहुबलीश्वरं, तत्व गौतम पखे च तथैव श्री जिनागमम् । महावोरकोति सूरि tear विमल सन्मतिसागरं, गोम्मट प्रश्नोत्तरं वक्ष्ये पूर्वाचार्यानुसारतः ॥ अर्थ -- में नेमीनाथ स्वामी, बाहुबली स्वामी, गौतम गणधर जिनवाणी, आचार्य गुरुवर महावीरकीर्तिजी महाराज, याचार्य विमलसागरजी महाराज व प्राचार्य • सम्मत्तिसागरजी महाराज की वन्दना करता हु पूर्वाचार्यों के कहे अनुसार गोम्मट प्रश्नोत्तर चिन्तामणि ग्रंथ को कहूँगा । प्रश्न :- सच्चा सुख क्या है ? उत्तर :- -ग्रात्मा के द्रव्यकर्म, भावकर्म और नो कर्मों का सर्वथा छुट जाना ही सच्चा सुख है | प्रश्न :- द्रव्यकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- ज्ञानावरण, दर्शनावरण, वेदनीय, मोहनीय, प्रायु, नाम, गोत्र और अन्तराय इन ग्राठ कर्मों को द्रव्यकर्म कहते हैं । प्रश्न :-- उक्त कर्मों के उत्तर-भेद कितने हैं ? ह उत्तर :- ज्ञानावरण के ५ भेद, दर्शनावरण के भेद, वेदनीय के २ भेद, मोहनीय के २८ भेद, ( चारित्र मोहनीय के २५ भेद और दर्शन मोहनीय के ३ भेद, इस प्रकार मोहनीय के २८ भेद हुए ) ग्रायु के ४ भेद, नाम के ६३ भेद, गोत्र के २ भेद और अन्तराय के 2 भेद - इस प्रकार द्रव्यकर्मों के उत्तरभेद १४८ हैं । प्रश्न :- ज्ञानावरण के ५ भेद कौनसे हैं ? उत्तर :-- -१ मतिज्ञानावरण, २ श्रुतंज्ञानावरण, ज्ञानावरण, ५ केवलज्ञानावरण - ३ अवधिज्ञानावरण, ४ मन:पर्यय इस प्रकार ज्ञानावरण के पांच भेद हैं ।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy