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क्रमांक
( ३ ) श्रध्याय: तीसरा- सम्यग्ज्ञान
(४)
ज्ञान का उभेत २४.
अध्याय चौथा--प्रमाप-नय
[ प्रमाण, नय का स्वरूप, भेद-प्रभेद - ६५, परोक्षप्रमाण के भेद व स्वरूप - ६५-६६ साधन, सा-य, हेतु हेत्वाभासादिका स्वरूप६६-१००; नय के मुख्य भेद-उपभेद १००१०२, व्यवहार नय व उपनय - १०२, नय व निक्षेप का स्वरूप १०३-१०४.]
( ५ ) श्रध्याय: पांचवां-चारित्र
पृष्ठ संख्या
चारित्र का स्वरूप व भेद - १०५ - १०६, प्रतिमाओं के नाम, दर्शन व व्रत प्रतिमा का स्वरूप १०६-१०७, प्रणव्रत का स्वरुप व भेद१०७ - १२४, गृहस्थों के भ्रष्ट मूलगुरण - १९२४. १२५. गुरंग व्रत का स्वरूप व भेद - १२५-१४०, व्रती को छोडने योग्य पदार्थ - १४०-१४५, शिक्षाव्रत स्वरूप व भेद - १४५ - १४६, देशाव काशिक का स्वरूप - १४६-१५०, सामायिक का स्वरूप और विधि- १५०-१५८, प्रोषधोपवास का स्वरूप व भेद- १५८-१६४, वैयावृत्य का स्वरूप और भेद- १६४--१६६, दान का स्वरूप व भेदादि - १६६ - १७३, वैयावृत्य के अतिचार- १७३ - १७४, सामायिक
८६६४
६५ -- १०४
१०५ -- ४६२ .