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के प्रकाशन कार्य को सम्पन्न करवाने में बहुत सह्योग रहा है । क्षुल्लक महाराज इस समय गगाधराचार्य महाराज के संघ के साथ ही वर्षायोग कर रहे हैं। प्राशा है आपका सहयोग, मार्ग दर्शन इस ग्रंथमाला को ग्रंथ प्रकाशन कार्यों में सदैव प्राप्त होता रहेगा। .
कलकत्ता निवासी परम गुरु भक्त श्रीमान् एस. एल. बगड़ा साहब का मैं बहुत-बहुत अाभारी हूँ कि उन्होंने भो समय-समय पर हमें मार्ग दर्शन देकर प्रकाशन कार्यों को सुचारू रूप से सम्पन्न करवाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है।
ग्रंथमाला के प्रकाशन कार्यों में सभी सहयोगी कार्यकर्ताओं का बहत-बहत अाभारी है कि आप सभी ने समय पर कार्य पूरा करवाने में मुझे सहयोग प्रदान किया है। श्री प्रदीपकुमार गंगवाल . में गणधराचार्य कथसागरजी महाराज के शुभाशीर्वाद से इस कार्य में बहुत ही परिश्रम किया है। अन्य सहयोगी गगा सर्व श्री मोती . लालजी हाड़ा, श्री लिखमीचन्द जी बक्षी, श्री लल्लूलाल जी गोधा, श्री रविकुमार गंगवाल, · जैन संगीत कोकिला रानी बहिन श्रीमति कनकप्रभाजी हाड़ा, श्रीमति मेमदेवी गंगवाल, ब. वहिन चन्द्ररेखाजी
आदि का भी विशेष सहयोग रहा है। ग्रंथमाला समिति द्वारा प्रकाशन कार्य को बहुत ही सावधानी पूर्वक देखा गया है, फिर भी इतने विशाल कार्य में त्रुटियों का रहना स्वाभाविक है। प्रकाशन सामग्री मेरे सामान्य ज्ञान की परिधि के बाहर हैं। मैंने तो मात्र परम पूज्य श्री १०.८ गगाधराचार्य ऋथुसागरजी महाराज की प्राज्ञा को शिरो धार्य करके यह कार्य किया है । अतः साधुवर्ग, विद्वतजन, व अन्य पाठकों से निवेदन है कि ब्रुटियों के लिए क्षमा करें।
अन्त में पंचकल्याणक महोत्सव के पावन पवित्र शुभावसर पर परम पूज्य श्री १०८ गंगधराचार्य कुंथुसागरजी महाराज को विबार नमोस्तु अर्पित कर यह ग्रंथराज उनके करकमलों में भेंट कर प्रार्थना करता हूँ कि वह इस महत्वपूर्ण ग्रंथ का विमोचन करने की कृपा करें।
गणधराचार्य महाराज के चरणकमलों का
परम गुरु भक्त . संगीताचार्य प्रकागान संयोजक
शान्तिकुमार गंगवाल . . . . . . . . (बी. कॉम.)
जयपुर (राजस्थान)