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.. अध्याय : पांचवां ] .
[ २४३ यदि कोई मनुष्य मोधर्म स्वर्ग में इन्द्र उत्पन्न होता है, तो उसका मन्त्री सबकी तरफ से इस प्रकार कहता है कि हे नाथ! आपने यहां उत्पन्न होकर इस स्वर्ग को पवित्र किया सो आज हम धन्य हुए, हमारा जीवन भी आज सफल हश्रा हे नाथ ! आप प्रसश होइये, चिरंजीव रयि, हे देव ! आपका उत्पन्न होना पुण्यरूप है, पवित्र है, आप इस स्वर्ग लोक के स्वामी होइये यह सौधर्म नामा स्वर्ग है, सैकड़ों देवों से पूजित है। यह स्वर्ग सर्व देवों के कल्यागरूप समुद्र को बढाने के लिये चन्द्रमा के समान है। यह सौधर्म नामा स्वर्ग ऐसा है कि इसमें जो इन्द्र उत्पन्न होता है, उसका ईशान इन्द्र प्रादि समस्त देव परमोत्सव करते हैं। इस स्वर्ग में वांछित पदार्थ भोग ने योग्य हैं, यहां नित्य नया यौवन है, अविनश्वर लक्ष्मी है, निरन्तर सुख ही सुख है । तथा यह स्वर्गीय विमान जहाँ जाना चाहे वहीं जा सकता है, इसका दर्शन अप्ति मनोहर है, यह देवों की मंडली (सभा) अापके चरण कमलों में नम्रीभूत है । ये मनोहर अप्सराओं से भरे हुए चन्द्रकान्त के समान मनोडर आपके महल हैं, ये रस्तमयी बापिकायें हैं, ये क्रीडानदियाँ तथा पर्वत है। यह सभा भवन है सो नम्री भूत देवों के द्वारा सेवा करने योग्य हैं, पूजितं . है, यह रत्नमयी दीपकों से प्रकाशमान पुष्पसमूहों से शोभित । और विनीत चतुरवेश की धरने वाली कामरूपिणी सुन्दर स्त्रियाँ नृत्य संगीतादि रस में उत्सुक होकर आपके सामने नृत्य करने के लिये आपकी प्राज्ञा की प्रतीक्षा कर रही हैं । तथा यह आपका छत्र है, यह अापका पूजनीय सिंहासन है, यह बमरों का समूह है, ये विजय की ध्वजायें हैं । और ये सब आपकी अग्नमहिषी अर्थात् पट्टदेवियाँ हैं, ये श्रेष्ठ देवांगनाओं द्वारा वंदने योग्य हैं तथा इन्द्र के ऐश्वर्य को तृण की समान समझने वाली है। तथा शुगररूपी समुद्र को लहरों के समान चंचल हैं, विलास के कारण जिनकी भौंहे प्रफुल्लित. हैं अौह लीलारूपी अलंकार से पूरित हैं; सो हे नाथ ये आपके चरणों में समर्पित हैं। इन .. पट्टदेवियों के शरीर की शोभा अनुपम है। क्योंकि इनका शरीर योग्य निर्मल स्निग्ध पवित्र परमाणों के द्वारा बना हुआ है । हे नाथ ! वह नापका महामन वाला ऐरावत नामा हस्ती है; यह अशिमा महिमादि आठ गुणों के ऐश्वर्य से समस्त प्रकार की विक्रियारूप लक्ष्मी को धरने वाला है। और यह आपकी मदोन्मत्त हस्तियों की सेना है, यह घोड़ों की सेना है, इसका वेग मन के समान हैं; यह सुवर्णमयी ऊँचे-ऊँचे रथों की
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