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________________ १०१० ] भूत का पुरुषार्थ वर्तमान से परिणमन करता है, वैसा पायेंगे; [ गो. प्र. चिन्तामणि का भाग्य एवं वर्तमान का पुरुषार्थं भविष्यत का भाग्य रूप जैसे बीज से वृक्ष एवं वृक्ष से बीज की तरह । जैसा बोयेंगे As we sow So we reap. पुरुषार्थ एवं भाग्य में कारण कार्य भाव है । साधारण सकल जन्तुषु वृद्धि नाशशौ, जन्मान्तराजित शुभाशुभ कर्म योगात् । धीमान् स यः सुगति साधन वृद्धि नाशः, तद्वत्याद्विगत धीर परोऽभ्यधायी ॥ २१३४॥ समस्त प्राणियों में समान रूप से पूर्व जन्म में संचित किये एवं पाप भाग्य के उदय से प्रायु शरीर एवं धन-सम्पत्ति आदि की वृद्धि और उनका नाश होता । यदि इस प्रकार कहा जाय कि देव की सिद्धि पूर्व देव से ही होती है अर्थात् पहले २ के भाग्य से ही आगे २ का भाग्य बनता चला जाता है, तब तो इस प्रकार से भाग्य की परम्परा चलती रहने से कभी भी किसी को मोक्ष नहीं हो सकेगा और जो इस भाग्य परंपरा से चलता रहता है, वह " तद्वयत्ययाद्विगत धीर परोऽभ्यधायी " दुर्गंति ( भाग्य ) के साधन भूत वृद्धि माश को ( पुरुषार्थ को ) श्रपमाने से निर्बुदिव कहा जाता है । जो अभव्य एवं दूरान्दूर भव्य हैं, जिन्ह को कभी भी मोक्ष जाना नहीं है, वह अनादि पूर्व परंपरा देव से अनन्त परंपरा देव ग्राधीन रहकर भाग्य की अता से स्वाधीन कभी नहीं हो सकता है। किन्तु इससे विपरीत "श्रीमान स यः सुगति साधन वृद्धि नाशः सुगति अर्थात् मोक्ष की सिद्धि करने और वृद्धि एवं भाग्य का नाश करने के लिए पुरुषार्थ को अपनाता है बुद्धिमान, भव्य पुरुषार्थ है, उसका भाग्य अनादि एवं शान्त है । यदि देव से ही कुछ मान लिया जायेगा, तो भाग्य की उत्पत्ति रोकने के लिए जो पुरुषार्थ किया जाता है, वह भी निष्फल हो जायेगा । यदि पुरुषार्थ की सफलता निमित्त है ऐसा कहा जाय तो पुरुषार्थ से ही भाग्य का विनाश होता है । इससे मोक्ष की प्रसिद्धि होने से पुरुषार्थ सफलित हो जावेगा, सो इस प्रकार का कथन "देवादेव सर्वः भवति इति या प्रतिज्ञा सा हीयते" देव से ही सब कुछ होता है, इस कथन का निवारण हो जाता है, क्योंकि इस कथन से पुरुषार्थ भी कार्यकारी
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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