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________________ सम्यानातिका भावाटीका 1 -Lama - masan छह राशिक का यंत्र .. प्रमारणराशि फलराशि इच्छाराशि लब्धप्रमाण केवली केवली २२ मास ६, समय काल ४०८४१छह मास आठ समय गुणा काल समय काल मास ६, समय ४०८४१ छह मास पाठ समय गुरगा समय ३२६७२० समय केवली २२ केवली ६८५०२ ३२६७२८ समय केवली समय ३२६७२८/२ आषा केवली ९८५०२ समय केवली समय ३२६७२८/४ चौथाई केबली ८९८५०२ समय केवली समय ३२६७२८ म (आठवां) भाग केवली ८९८५०२ तहां बाईस केवलज्ञानी पाठ समय अधिक 'छह मास मात्र काल विर्षे होइ, तो आठ लाख अठ्याणवै हजार पांच से दोय केवलज्ञानी केते काल विर्षे होइ ? असे राशिक कीएं चालीस हजार पाठ से इकतालीस कौं छह मास आठ समयनि करि गण, जो प्रमारण होइ, तितना काल का प्रमाण प्राव है । बहरि पाठ समय अधिक छह मास काल विर्षे निरंतर केवल उपजने के आठ समय हैं; तौ पूर्वोक्त काल प्रमाण विर्षे केते समय हैं ? असें त्रैराशिक कीए तीन लाख छब्बीस हजार सात से अठाईस समय प्राव हैं । बहुरि आठ समयनि विर्षे प्राचार्यनि के मतनि की अपेक्षा बाईस बा चवालीस वा अध्यासी वा एक सौ छिहतरि केबलशान उपजावे, तो पूर्वोक्त समयनि का प्रमाण विर्षे वा तिसत आधा विर्षे का चौथाई विर्षे वा आठवां भाग विर्षे केते केवलज्ञान उपजावै जैसे चारि प्रकार राशिक कीए केवलानि का प्रमाण आठ लाख अठ्याणवै हजार पाच से दोय प्राव है, जैसें जानना । . .. भाग एक समय विर्षे युगपत् संभवती असी क्षपक का उपशमक जीवनि की विशेष संख्या गाया तीनि करि कहैं हैं
SR No.090410
Book TitleSamyaggyanchandrika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashpal Jain
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages873
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size28 MB
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