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________________ ४६२ ] [ गोम्मटसार जीवका गाया ३२६ ( १०२४) । पशुलिपिशुलि का प्रमाण दोय से छप्पन ( २५६ ) | चूरिंग का प्रमाण चौसठ (६४) । चूरिंगचूरिंग का प्रमाण सोलह (१६ ) असें द्वितीयादि चूर्णचूरिंग का प्रमाण च्यारि प्रादि जानने । इहां ऊपर जघन्य ६५५३६ स्थापि, नीचे एक बार प्रक्षेपक १६३८४ स्थापि, जोड़ें, पर्यासमास के प्रथम शेव का इक्यासी हजार व बीस (१९२०) प्रमाण हो है । बहुरि ऊपरि जघन्य ( ६५५३६ ) स्थापि, नीचें दोय प्रक्षेपक ( १६३८४४ १६३८४) एक प्रक्षेपकप्रक्षेपक स्थापि, जोड़ें पर्यायसमास के द्वितीय भेद का एक लाख दोय हजार च्यारि से (१०२४०० ) प्रमाण हो हैं । बहुरि ऊपर जघन्य ६५५३६ स्थापि, नीचे तीन प्रक्षेपक ( १६३८४) १६३८४ १६३८४) तीन प्रक्षेपकप्रक्षेपक एक पिशुलि स्थापि, जोडें, तीसरे भेद का एक लाख अठाईस हजार (१२८००० ) प्रमाण हो है ! बहुरि ऊपरि जयन्य स्थापि, नीचें नीचें व्यारि प्रक्षेपक, छह प्रक्षेपक प्रक्षेपक, च्यारि पिशुलि, एक पिशुलिपिशुति स्थापि, जोड़ें, चौथे भेद का एक लाख साठि हजार (१६०००० ) प्रमाण हो है । बहुरि ऊपरि जघन्य स्थापि, नीचे नीचे पांच प्रक्षेपक दश प्रक्षेपक प्रक्षेपक, दश पिशुलि पांच पिशुलिपिशुलि, एक चूर्णि स्थापि, जोड़ें, पांचवें भेद का दोय लाख ( २,००००० ) प्रभाग हो है । बहुरि ऊपरि जघन्य स्थापि, नीचें नीचें छह प्रक्षेपक, पंचदश प्रक्षेपक प्रक्षेपक, बीस पिशुलि, पंद्रह पिशुलिपिशुलि, छह चूर्णि एक चूर्णिकूणि स्थापि, जोडें, छठे स्थान का दोय लाख पचास हजार ( २५०००० ) प्रमाण हो है । जैसे ही क्रम तें सर्व स्थाननि विषै ऊपरि तौ जघन्य स्थापन करना । ताके नीचें नीचें जितना गच्छ का प्रमाण तितने प्रक्षेपक स्थापन करने । इहां जेथवां स्थान होइ, तिस स्थान विषे तितना गच्छ जानना । जैसें छठा स्थान विषे गच्छ का प्रमाण छह होइ । बहुरि तिनके नीचे एक घाटि गच्छ का एक बार संकलन धन का जेता प्रमाण, तितले प्रक्षेपप्रक्षेपक स्थापने । बहुरि तिनके नीचें दोयं घाटि गच्छ का दो बार संकलन धन का जेता प्रमाण, तितने पिशुलि स्थापन करने । बहुरि तिनके नीचे तीन घाटि
SR No.090410
Book TitleSamyaggyanchandrika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashpal Jain
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages873
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size28 MB
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