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________________ E २४. j घोम्मटसार जीवकाण्ड गापा ११७ tantras- - ताई. परस्पर गुणे जो परिमाण आवै, सो परिमाण जघन्य युक्तासंख्यात का जानना । याही कौं अंक संदृष्टि करि दिखाइए है - जघन्य परीतासंख्यात का परिमारग च्यारि (५ ) याका विरलन कीया १, १ - Hoteine ४४४४ NamAS १, १ । बहुरि एक-एक के स्थानक, सोहि दीया १ १ १ १ परस्पर गुणन कीया, तब दोय सै छरप्पन भया । असे ही जानना । सो इस ही जघन्य युक्तासंख्यात का नाम प्रावली है, जात एक पावली के समय जघन्य युक्तासंख्यात परिमाण है । बहुरि याके ऊपरि एक एक बघता एक घाटि उत्कृष्ट युक्तासंख्यात पर्यन्त मध्यम युक्तासंख्यात के भेद जानने । बहुरि एक पाटि जघन्य असंख्यातासंख्यात परिमाण उत्कृष्ट युक्तासंख्यात जानना। ...अब जघन्य असंख्यातासंख्यात कहिए है -- जघन्य युक्तासंख्यात कों जघन्य युक्तासंख्यात करि एक बार परस्पर गौ, जो परिमाया श्राने, सो जघन्य असंख्यातासंख्यात जानना । याके ऊपरि एक-एक बघता एक धाटि उत्कृष्ट प्रसंख्यातासंख्यात पर्यन्त मध्यम असंख्यातासंख्यात जानने । एक पाटि जघन्य परीतानंत प्रमाण उत्कृष्ट असंख्यातासंख्यात जानना । . अब जघन्य परीतानंत कहिए है - जघन्य असंख्यातासंख्यात परिमारण तीन राशि करना - एक शलाका राशि, एक विरलन राशि, एक देय राशि । तहां विरलन राशि का तो पिरलन करना, बखेरि करि जुदा-जुदा एक-एक रूप करना, पर एक-एक के ऊपरि एक-एक देय राशि धरना। भावार्थ - यह जघन्य असंख्यातासंख्यात प्रमाण स्थानकनि विषं जघन्य असंख्यातासंख्यात जुदे-जुदे मांडने । बहरि तिनिकौं परस्पर गुणिए, असें करि उस शलाका राशि मैं स्यों एक घटाइ देना । बहुरि असे कीए जो परिमाण पाया, तितने परिमाण दोय राशि करना, एक विरलन राशि, एक देय राशि । तहां विरलन राशि का विरलन करि एक-एक ऊपरि एक-एक देय राशि की स्थापन करि, परस्पर गुरिगए । असें करि उस शलाका राशि मैं स्यों एक और घटाइ देना । बहुरि ऐस कीए जो परिमाण प्राया, तितने प्रमाण विरलन-देय स्थापि, विरलन राशि का विरलन करि एक-एक प्रति देय राशि कौं देइ परस्पर मुणिये, तब शलाका राशिसुं एक और काहि लेना, असे करते-करते जब यह पहिली बार किया शलाका राशि सर्व संपूर्ण होइ, तब तहाँ जो किछ परिमाण हुवा, सो यहु महाराशि असंख्यातासंख्यात का मध्य KAR.CAREER
SR No.090410
Book TitleSamyaggyanchandrika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYashpal Jain
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages873
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size28 MB
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