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________________ ३८४ परमानंदरतोष सहस्रनामस्तोत्र सहस्रनामस्तो सुप्पयदोहा धानन्दा योगसार तत्वसार योगज्ञान दादसी गाथा संबोधपंचासिका श्राराधनासार व्याराधनाकार टीका पट् प्राभृत ध्यानसार सारसमुच्चय सिन्दूर करणा श्रुतस्कंच पूजा संग्रह कर्मनिरूपण त्रिलोकस्थिति लघु कल्याणक सुभाषितावली सुमषिताव सुनि योगचन्द्र देवसेन विषय-सूची श्रात्मानुशासन प्रायश्चित समुच्चय पुरुषार्थसिद्धयुपाय उपासकाध्ययन देवागमस्तोत्र श्री० कुन्दकुन्ड | | सोमप्रभाचार्य ब्रह्म हेमचन्द्र कर्त्ता का नाम गुणभद्राचार्य नंदिगुरू श्रमृत चन्द्र समन्तभद्र 11 प्राकृत हिन्दी श्रपत्र श प्रावृत संस्कृत प्राकृत संस्कृत 23 35 संस्कृत प्राकृत संस्कृत 93 33 23 ३१ प्राकृत 77 हिन्दी 22 33 " 33 संस्कृत २५७१ गुटका नं० २६६ | पत्र सं० १९८२ | साइज १ ३३४६ ३ ६श्च | लेखनकाल - सं० १८६६ कार्तिक युदी ६ पूर्ण एवं शुद्ध । दशा उत्तम | वेष्यन नं० २६६२ ॥ " " 23 भाषा संस्कृत [ संग्रह विशेष " 1 -
SR No.090393
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages446
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size11 MB
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