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________________ ..संग्रह] कत्ती का नाम विशेष बनारसीदास रुपचंद लेखन काल सं० १५५२ सं. १७५० विषय-सूची पावनी कानपच्चीसी दशप्रत्याख्यान पदसंग्रह मानबावनी जखडी | अध्यात्मपैडी | पंचमंगल विवेक युद्ध | दोहावली पंचेन्द्रिय की बेलि जोगीरासो रुपचंद बनारसीदास मनासीदास रुपचंद २५०८ गुटका नं० २०३। पत्र सं० १८० . साहज-६४१ इछ । लेखनकाल-सं० १५७० चैत्र बुदी ६ । पूर्ण एवं शुद्ध । दशा-सामान्य । बेष्टन नं. २६११ । विशेष--पं० राम वन्द्र ने स्वयं पटनार्थ प्रतिलिपि की थी। भाषा विशेष संस्कृत " प्रावत विषय-सूची की का नाम जिनसहस्त्रनाम प्राशाधर प्रतिष्ठापाठ ইনসাফলqদখুন। या पानंदि ग्रादित्यवार कमा इनके अतिरिक्त पूजात्रों का संग्रह है। २५०६ गुटका नं० २०४। पा सं० १७८ । साइज-११x६ दशा-सामान्य । वेटन नं० २६१२। विषय-सूची कती का नाम जिनसहस्रनामा सुमतिसागर द्वादशव्रतपूजा त्रेपन क्रियापूजा पंवपरमेष्ठीवत पूजा शुमचन्द्र पंचकल्याणकमाला धाशाधर च । लेखनकाल ४ | पूर्ण एवं शुद्ध । भाषा विशेष रचनाकाल सं० १८.
SR No.090393
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherPrabandh Karini Committee Jaipur
Publication Year
Total Pages446
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size11 MB
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